अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल: कोरोना नहीं था, महिला को बेवजह कोविड वार्ड में रखा, जान गई
अहमदाबाद। गुजरात के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग महिला को बेवजह कोविड वार्ड में ले जाया गया। उन्हें सांस लेने में दिक्कत थी। हालांकि, उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई। कोरोना न होते हुए भी उन्हें कोरोना पॉजिटिव लोगों वाले वार्ड में रखा गया। वहां कुछ ही समय बाद उनकी जान चली गई। परिजनों का आरोप है कि, लगातार कहने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने वृद्धा को कोविड वार्ड में ही रखा। इससे वृद्धा की जान चली गई।

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कोरोना महामारी के बीच अहमदाबाद स्थित सिविल हॉस्पिटल में ऐसी ही कई लापरवाही पहले भी सामने आई हैं। इस सिविल अस्पताल को एशिया का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल माना जाता है, यहां तमाम तरह की आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं। बावजूद इसके गुजरात हाईकोर्ट इसे कालकोठरी से भी बदतर बता चुका है। मई के महीने में यहां इलाज के दौरान दम तोड़ने वाले कई मरीजों के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों और नर्सों की लापरवाही और उदासीनता की वजह से उनके परिजन की जान चली गई।

अपनी दादी को खो चुके हार्दिक वलेरा नामक एक शख्स ने कहा कि, इस हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने मेरी 81 वर्षीय दादी को जिंदा रखने के लिए उनसे पाइप को हाथ से दबाकर हवा भरते रहने को कहा था। 27 मई को ऐसा करने के कुछ देर बाद ही दादी की मौत हो गई। हार्दिक ने दावा किया कि डॉक्टरों ने दादी की कोरोना वाली जांच करने की जहमत भी नहीं उठाई गई। हार्दिक बोले, 'हमारा घर दानीलिमिडा क्षेत्र में पड़ता है, जो कि निषिद्ध क्षेत्र में है। हम 26 मई रात में दादी को सिविल अस्पताल ले कर गए थे, क्योंकि उन्हे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। हमारी दादी को वहां पहले भूतल पर रखा गया, फिर आधी रात के समय उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। किंतु लगातार मेरे आग्रह के बाद भी डॉक्टरों ने कोरोना की जांच के लिए उनका सैंपल तक नहीं लिया। जिसके चलते बाद में उनकी मौत हो गई।'












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