कोविड-19 से निपटने को यहां तैनात हैं 1125 कोरोना वॉरियर्स, मरीजों को मिल रहीं ऐसी सुविधाएं

अहमदाबाद। कोरोना वायरस से गुजरात में सर्वाधिक प्रभावित अहमदाबाद में हजारों कोरोना वॉरियर्स मरीजों की जान बचाने में जुटे हैं। यहां सिविल अस्पताल स्थित कोविड अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए 1125 कोरोना वॉरियर्स तैनात हैं। ये दिन-रात यहीं रहकर कोरोना से जंग लड़ रहे हैं। जैसा कि, पूरे राज्य के साथ-साथ गुजरात के बाहर के भी कोरोना मरीज यहां पर दाखिल हैं, तो कोरोना वॉरियर्स भी उनकी मदद के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

राज्य के इस हॉस्पिटल में भर्ती हैं 657 मरीज

राज्य के इस हॉस्पिटल में भर्ती हैं 657 मरीज

अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल के प्रबंधन के मुताबिक, कोविड अस्पताल में फिलहाल 657 कोरोना मरीज दाखिल हैं। जिनमें से 529 पॉजिटिव हैं, जबकि 129 मरीजों का टेस्ट पूरा हो चुका है। इनका परिणाम आना बाकी है। इन मरीजों में से 268 पुरुष मरीज हैं वहीं 249 महिला मरीज हैं। इनमें 23 बालिकाएं व 17 बालक मरीज भी हैं।

मरीजों के इलाज के लिए हजार से ज्यादा डॉक्टर

मरीजों के इलाज के लिए हजार से ज्यादा डॉक्टर

अस्पताल के आरएमओ डॉ. संजय सोलंकी ने बताया कि, यहां 7 मरीज वेंटिलेटर पर भी हैं। वहीं, 27 मरीज ऑक्सीजन सिलेंडरों के सहारे भर्ती हैं। 623 मरीजों को सामान्य उपचार दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, यहां पर प्रत्येक पाली में 23 चिकित्सक, 104 नर्स, 11 पैरामेडिकल स्टाफ और 234 कर्मचारी वर्ग चार के हैं। इस तरह 1125 लोग अपने-अपने घर-परिवार के चिंता किए बिना यहां पर सेवा में जुटे हैं।

यूं भी मदद कर रहे हैं ये कोरोना वॉरियर्स

यूं भी मदद कर रहे हैं ये कोरोना वॉरियर्स

अस्पताल में दाखिल होने वाले मरीज के किसी रिश्तेदार को संक्रमण नहीं लगने के लिए वार्ड में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है। किसी विशेष मामले में मरीज की मांग या मरीज के वेटिलेटर पर होने या नियमों के तहत मरीज के रिश्तेदार को रक्षात्मक उपकरणों के साथ जाने की मंजूरी दी जाती है। इसके अलावा एक विशेष ड़ोम बनाया गया है।

घरवालों से वीडियो कॉलिंग पर कराते हैं बात

घरवालों से वीडियो कॉलिंग पर कराते हैं बात

संजय सोलंकी ने कहा कि, कोविड अस्पताल में सभी के लिए बैठने की व्यवस्था की जाती है। यहां भी अस्पताल का स्टाफ तैनात किया जाता है। इन्हें अस्पताल की ओर से ही मोबाइल भी दिया गया है। जिसके जरिए मरीज अपने रिश्तेदारों के साथ वीडियो कॉलिंग से बात कर सकते हैं।

इन शहरों में बनाए गए स्पेशल कोविड हॉस्पिटल

इन शहरों में बनाए गए स्पेशल कोविड हॉस्पिटल

राज्य में अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा-राजकोट आदि बड़े शहरों में 100-100 से भी ज्यादा बेड के स्पेशल कोविड हॉस्पिटल तैयार किए गए हैं। अचंभा करने वाली बात यह है कि, यहां केवल 6 दिनों में 2200 बेड का कोविड हॉस्पिटल बना दिया गया। गुजरात सरकार ने राज्य के जिन 4 शहरों में कोविड हॉस्पिटल बनाने की घोषणा की थी, उनमें अहमदाबाद में सबसे बड़ा 1200 बेड का, इसके बाद सूरत में 500 बेड का, फिर वडोदरा-राजकोट में 250-250 बेड का हॉस्पिटल शामिल थे। अब इन अस्पतालों ने काम भी करना शुरू कर दिया है। कोरोना से जूझ रहे मरीजों को यहां भर्ती किया जा रहा है।

सिर्फ कोरोना मरीजों को ही भर्ती कर रहे

सिर्फ कोरोना मरीजों को ही भर्ती कर रहे

गुजरात स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में कोविड हॉस्पिटल डब्ल्यू एच ओ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइड लाइन के अनुसार काम कर रहे हैं। डॉक्टर्स ने कहा कि, कोरोना पॉजीटिव मरीज से किसी और को संक्रमण न हो, इसलिए इस हॉस्पिटल में केवल कोरोना से संक्रमित मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है। यहां पूरी व्यवस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन-केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन के अनुसार रखी गई है।

आइसोलेशन वार्डों में टीवी भी रखवाई गईं

आइसोलेशन वार्डों में टीवी भी रखवाई गईं

राज्य सरकार अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड में टीवी का इंतजाम भी करा रही है, ताकि लोग अकेलापन महसूस न करें और न ही छोड़कर भागें। वहीं, मरीजों के खाने-पीने और सोने की व्यवस्था भी कराई गई हैं। क्वारंटाइन हुए जिन लोगों की सरकारी सेंटर्स पर रखा जा रहा है, उनके लिए भी ऐसी ही व्यवस्था हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव जयंती रवि का कहना है कि, राज्य सरकार मरीजों की सख्त निगरानी कर रही है। यदि लोग नियमों का पालन करें, तो इस महामारी पर जल्द की काबू में लाया जा सकता है।

6 दिन में ऐसे तोड़ दिया था ​चीन का रिकॉर्ड

6 दिन में ऐसे तोड़ दिया था ​चीन का रिकॉर्ड

अहमदाबाद स्थित जिस 2200 बेड के हॉस्पिटल में सभी तरह की सुविधाओं और दवाओं की मौजूदगी बताई जा रही हैं, उसके निर्माण के साथ ही चीन का रिकॉर्ड टूट गया था। कोरोना वायरस के मरीजों के लिए चीन ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए हुओशेनशान में 1000 बेड का अस्पताल 10 दिन के अंदर बनाया था। उसका दावा है कि, कंस्ट्रक्शन वर्कर्स ने दिन-रात मेहनत से पूरा अस्पताल 8 दिन में बनाया था, हालांकि, उसमें मशीन-इक्विपमेंट लाने में 48 घंटे और लगे।

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