इलाज के लिए नहीं मिला कैश तो जवान ने खुद के सीने में उतारी गोली

आगरा के इस CRPF जवान के दिल की हालत सही नहीं थी और इसे इलाज की सख्त जरूरत थी।

नई दिल्ली। विमुद्रीकरण के 34 दिन बीत जाने पर भी हालात सामान्य होने का नाम नहीं ले रहे हैं।

ताजा मामला उत्तर प्रदेश के आगरा के बुढ़ाना का है जहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) से सेवानिवृत्त कर्मी ने बैंक शाखा से कैश ना मिलने पर खुद को गोली मार ली।

जानकारी के मुताबिक 54 वर्षीय राकेश चंद 2012 में CRPF में हेड कॉन्सटेबल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

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लगी थीं 5 गोलियां

1990 में कश्मीर स्थित बारामूला में हुए एक हमले के दौरान उनके सीने 5 गोलियां लगी थीं फिर भी वो मौत के मुंह से बाहर आ गए थे लेकिन नोटबंदी ने उनके सब्र का इम्तिहान लिया और वो हार गए।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार राकेश चंद आगरा के ताजगंज स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में हर रोज कैश की आस में जाते। उन्हें अपने मेडिकल जांच के लिए पैसों की सख्त आवश्यकता थी। लेकिन उन्हें कैश नहीं मिला। यह जानकारी राकेश चंद के बेटे सुशील कुमार ने दी।

थी 6-7,000 रुपए की जरूरत

अखबार के मुताबिक राकेश चन्द को इलाज के लिए 6-7,000 रुपए की जरूरत थी। जानकारी के मुताबिक सुशील खुद सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में थे और उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी।

सुशील ने बताया कि उनके पिता राकेश चंद को 15,000 रुपए मासिक पेंशन मिलती थी। सीने में 5 गोलियां लग जाने के कारण उनके सीने की हालत खराब थी।

कैश न मिल पाने की वजह से उन्होंने शनिवार सुबह खुद को लाइसेंसी बंदूक से गोली मार ली।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को राष्ट्र के नाम संदेश में घोषणा की थी कि 500 और 1,000 रुपए के करेंसी नोट विमुद्रीकृत किए जा रहे हैं।

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