पुअर को नहीं मिलेगा यूपी की प्रो पुअर योजना का लाभ

चर्चा के दौरान ताज नेचर वाक के पीछे स्थापित यमुना नदी तटीय उस रमणीक गांव ' नगला पैमा ' का कोई उल्लेयख नहीं किया गया जहां का हर मकान ताजमहल के 'साइड व्यू' को दर्शाने वाला है। आगरा महानगर की टूरिज्मि 'डव्लपमेंट' को आमादा लाबी ने अपनी जिद और अनुभव हीनता से इस गांव के लोगों का आना जाना उनके परपरागत रास्ते से रुकवा रखा है।
सुप्रीम कोर्ट में भी इसी लाबी के प्रभाव से अधिकारियों के द्वारा लगाये गये हलफनामे से गांव वालों के दशहरा घाट से पूर्वी गेट मार्ग होकर आने जाने पर तो रोक लग गयी किन्तु न्यायालय के एक अन्य आदेश के तहत ग्रामीणों को सुविधा जनक वैकल्पिक मार्ग अब तक नहीं उपलब्ध करवाया जा सका है। जो रास्ता वैकल्पिलक मार्ग के रूप में दिया गया है वह चार किमी का चक्कर काट कर है। यह भी उचित ढंग से नहीं बनवाया गया है। ताज की सुरक्षा के नाम पर जब से गांव का परम्परागत रास्ता बन्द हुआ तब से गांव में पर्यटकों विशेष रूप से विदेशी पर्यटकों का आना जाना समाप्त सा हो गया।
गरीब ग्रामीणों यानि 'पुअरों' की जो आमदनी टूरिस्टों के कारण हो जाती थी अब बन्द हो चुकी है। जो वैकल्पिक मार्ग सुझाया गया है उससे होकर गांव वाले तक आने जाने के समय और धन दोनों की दृष्टि् से अधिक खर्चीला मानते हैं। फिर कम समय के लिये आने वाले पर्यटकों से तो इसकी अपेक्षा किया जाना ही गलत होगा। वर्तमान मे रमणीक गांव 'नगला पैमा' की लगभग 'लैंड लाक ' जैसी स्थिति है।












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