आज से रघुराम राजन के हस्ताक्षर होंगे नोट पर
नई दिल्ली| देश की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और रूपये के कमजोर होने की चुनौतियों का सामना करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार रघुराम गोविंद राजन आज भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नए गवर्नर का कार्यभार संभाल लेंगे। वह वर्तमान गवर्नर डी. सुब्बाराव की जगह लेंगे। 50 वर्षीय राजन इस पद पर नियुक्त होने वाले सबसे कम उम्र के अधिकारी हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने छह अगस्त को आरबीआई के गवर्नर के रूप में तीन वर्षो के कार्यकाल के लिए रघुराम राजन की नियुक्ति को मंजूरी दी थी।
राजन पिछले साल अगस्त में वित्त मंत्रालय से जुड़े थे। वह बैंकर, शिक्षाविद और प्रौद्योगिकी अधिकारी रह चुके हैं। वह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से जुड़े रहे हैं और उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय में अध्यापन भी किया है। राजन आईएमएफ में भी सबसे कम उम्र के आर्थिक-परामर्शदाता तथा मुख्य अर्थशास्त्री (अक्टूबर 2003 से दिसंबर 2006 तक) थे। वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नई दिल्ली, भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्र रह चुके हैं। हर जगह वह गोल्डमेडलिस्ट रहे।

उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी नहीं है और इससे बाहर आने को लेकर सरकार और आरबीआई में सामंजस्य की कमी है। वित्त मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में सोमवार को उनका आखिरी दिन था। उन्होंने इस मौके पर संवादददाताओं से कहा, "हमारे पास काफी विचार हैं। सिर्फ मुद्रा का ही सवाल नहीं है। वित्तीय समावेशीकरण, विकास जैसे अनेक सवाल हैं। काफी कुछ करने को है।" उन्होंने हालांकि कहा कि ऐसी कोई जादुई छड़ी नहीं है, जिससे मौजूदा आर्थिक समस्या का समाधान कर दिया जाए। उन्होंने कहा, "ये समस्याएं रात भर में खत्म नहीं होंगी। कोई ऐसी जादू की छड़ी नहीं है। लेकिन आरबीआई कई समस्याओं का समाधान कर सकता है।"
रघुराम राजन उस समय चर्चा में आये जब उन्होने 2005 में ही आर्थिक मंदी आने की भविष्यवाणी कर दी थी। उनका कहना है कि वर्तमान समय में अर्थव्यवस्था के लिए हालात बड़े जोखिम भरे हैं। बतौर गवर्नर रघुराम के लिए यह भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।












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