'बेटे अखिलेश की राजनीतिक राह में कांटे बो रहे पापा मुलायम'

शर्मा ने कहा कि सरकार के भीतर संतों को रोकने का साहस नहीं है। यदि सरकार संतों को रोकेगी तो उसे बहुत गम्भीर परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार रहना होगा। संतों को रोके जाने के बाद यह आंदोलन सिर्फ उत्तर प्रदेश का न होकर पूरे देश में फैलेगा और उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। शर्मा से यह पूछे जाने पर कि विहिप नई परम्परा की शुरूआत करने पर क्यों अडिग है, तो उन्होंने कहा, परम्परा नई नहीं है।
संतों की परम्परा के लिए कोई निर्धारित तिथि नहीं होती है। ईद के मौके पर सरकार उन सैकड़ों मस्जिदों को भी खुलवाती है, जो लम्बे अरसे से बंद रही हैं, और 100 या 200 की संख्या मे संत यदि परिक्रमा करना चाहते हैं, तो वह इतनी बेचैन क्यों हैं। शर्मा ने कहा कि विहिप लम्बे समय से अमरनाथ की यात्रा में भी शामिल नहीं हुई है। लेकिन क्या कल को यदि विहिप यात्रा का फैसला करती है तो उसे यह कहकर नहीं होने दिया जाएगा कि यह नई परम्परा की शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि सच मानिए तो मुलायम का काल समाप्त हो गया है। उन्होंने अपने समय में कारसेवकों पर गोली चलवाई थी, और उनको उसका परिणाम भी भुगतना पड़ा। अब वह अपने बेटे को भी वही सिखा रहे हैं जो उनके भविष्य के लिए शुभ संकेत नही है। मुलायम अपने बेटे की राह में ही कांटे बो रहे हैं। शर्मा ने साफ तौर पर कहा संत लाठी, गोली खाने के लिए तैयार हैं। सरकार को ऐसा करने से पहले 100 बार सोचना पड़ेगा। यात्रा के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और वह अपनी तय तिथि पर ही होगी।












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