वीवीआईपी हेलीकाप्टर सौदा: सीएजी ने रक्षा मंत्रालय पर उठाये सवाल
नई दिल्ली| वीवीआईपी हेलीकाप्टर डील में हुए घोटाले की जांच में बड़ी अनियमितताएं सामने आयी हैं। सीएजी ने कल अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस मामले में रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना ने ढिलाई बरती जिसके चलते वायुसेना को पुराने एमआई-8 हेलीकॉप्टरों को विस्थापित करने में वक्त लगा। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने 3,726.96 करोड़ रुपये के आगस्टा वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकाप्टर सौदे में मंत्रालय और वायुसेना पर वास्तविक गुणवत्ता वाली जरूरत पर विचार करने में विफल होने का भी आरोप लगाया है।
संसद में पेश सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि खरीद में हुई देरी के कारण वायुसेना को पुराने हेलीकाप्टरों के इस्तेमाल करने की बाध्यता पैदा हुई। रिपोर्ट में कहा गया है, "ठेका तय करने वाली समिति द्वारा अपनाया गया लागत मानदंड पेश लागत की तुलना में अकारण उच्च रहा।" रिपोर्ट में कहा गया है कि वीवीआईपी हेलीकाप्टरों की खरीद प्रक्रिया तय प्रक्रिया से भटक गई।

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों को लाने-ले जाने वाले वायुसेना के संचार स्क्वाड्रन के लिए 12 अगस्टा वेस्टलैंड एडब्ल्यू 101 हेलीकाप्टरों के 3600 करोड़ रुपये के सौदे में कथित दलाली की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। पूर्व वायुसेना अध्यक्ष एस. पी. त्यागी के खिलाफ एक मामला भी दर्ज किया गया है। यह घोटाला तब प्रकाश में आया जब इटली की सरकार ने हेलीकाप्टर निर्माता कंपनी फिनमेकेनिका के सीईओ गिउसेप्पे ओरसी को फरवरी में सौदे हासिल करने के लिए कथित रूप से रिश्वत देने के आरोप में गिरफ्तार किया।
इस मामले की जांच के लिए एक सीबीआई टीम भी इटली भेजी गयी थी।












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