Balen Shah Foreign Policy: बालेन शाह को ट्रंप का बड़ा ऑफर, नेपाल को 6 फाइटर जेट देने का ऐलान, टेंशन में चीन
Balen Shah Foreign Policy: नेपाल की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अमेरिका ने एक बड़ा दांव खेला है। अमेरिका ने नेपाली सेना को छह लड़ाकू हेलीकॉप्टर देने का प्रस्ताव दिया है, जो 100 मिलियन डॉलर के ग्रांट (अनुदान) का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार के साथ संबंध सुधारने और दक्षिण एशिया में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए अमेरिका काफी सक्रिय दिख रहा है। हालांकि, नेपाली सेना इस "आकर्षक" ऑफर पर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है ताकि भविष्य में किसी बड़े आर्थिक बोझ से बचा जा सके।

'फॉरेन मिलिट्री फाइनेंसिंग' योजना के तहत ऐलान
अमेरिका अपनी 'फॉरेन मिलिट्री फाइनेंसिंग' योजना के तहत नेपाल को छह हेलीकॉप्टर देना चाहता है। इसके लिए काठमांडू स्थित अमेरिकी दूतावास लगातार नेपाली रक्षा मंत्रालय और सेना के संपर्क में है। अमेरिका का इरादा साफ है। वह नेपाल की सैन्य जरूरतों को पूरा कर वहां की सेना में अपना भरोसा बढ़ाना चाहता है। इससे पहले भी अमेरिका नेपाल को दो स्काईट्रक एयरक्राफ्ट सौंप चुका है, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ता दिख रहा है।
नेपाली सेना की हिचकिचाहट और चिंता
भले ही ये हेलीकॉप्टर अनुदान में मिल रहे हों, लेकिन नेपाली सेना इसके रखरखाव के खर्च को लेकर चिंतित है। जानकारों का मानना है कि इन लड़ाकू हेलीकॉप्टरों के लिए जरूरी फ्यूल, पायलटों की ट्रेनिंग और स्पेयर पार्ट्स का खर्च काफी महंगा पड़ेगा। सेना के अंदर इस बात पर मंथन चल रहा है कि क्या नेपाल का बजट इस दीर्घकालिक खर्च को वहन कर पाएगा। यही वजह है कि सेना ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई औपचारिक मुहर नहीं लगाई है।
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चीन का प्रभाव कम करने की कोशिश
अमेरिका के इस कदम के पीछे असली वजह चीन के बढ़ते दबदबे को रोकना है। हाल ही में अमेरिकी अधिकारियों ने नेपाल दौरे पर साफ कहा कि वे दक्षिण एशिया में किसी एक देश (चीन) का वर्चस्व नहीं चाहते। अमेरिका ने नेपाल को चीन के 'कर्ज जाल' (Debt Trap) से बचने की सलाह दी है। अमेरिका चाहता है कि नेपाल अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए चीन पर निर्भर होने के बजाय पश्चिमी देशों और सहयोगियों की ओर देखे।
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भारत और क्षेत्रीय समीकरण पर असर
नेपाल की भौगोलिक स्थिति भारत और चीन के बीच इसे बेहद संवेदनशील बनाती है। अमेरिका की बढ़ती सक्रियता भारत के लिए भी एक संकेत है। हालांकि भारत और अमेरिका के हित अक्सर चीन को रोकने के मामले में मिलते हैं, लेकिन नेपाल के घरेलू मामलों में किसी भी तीसरी शक्ति का बढ़ता हस्तक्षेप क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार इस अमेरिकी ऑफर और चीन के साथ अपने रिश्तों को कैसे संतुलित करती है।












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