1 मई से इस राज्य में महंगी हो जाएगी शराब, कांग्रेस के सत्ता संभालने के बाद 5वीं बार बढ़ रहा दाम
Karnataka Liquor Price Hike: कर्नाटक में शराब की कीमतें एक बार फिर बढ़ने वाली हैं। राज्य सरकार 1 मई से एक्साइज ड्यूटी स्ट्रक्चर (Excise Duty Structure) में संशोधन की तैयारी में है। यह कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद पांचवीं वृद्धि होगी, जिससे बेंगलुरू सहित आम उपभोक्ताओं, विशेषकर मिडिल और लोअर इनकम ग्रुप पर और अधिक दबाव पड़ेगा।
क्या है शराब के दाम बढ़ाने का नियम?
नई शराब नीति 'अल्कोहल बाई वॉल्यूम' (ABV) आधारित Taxation system लागू कर रही है। इस नए स्ट्रक्चर के तहत, एक्साइज ड्यूटी की गणना प्रत्येक बोतल में अल्कोहल की मात्रा के आधार पर की जाएगी। यानी, जिन पेय पदार्थों में अल्कोहल ज़्यादा होगा, उन पर अधिक टैक्स लगेगा, और उनकी कीमतें बढ़ेंगी।

कर्नाटक में 20 फीसदी बढ़ जाएगा दाम
जहां कुछ प्रीमियम कम अल्कोहल वाले प्रोडक्ट्स की कीमतों में थोड़ी नरमी आ सकती है, वहीं आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली शराब 20 प्रतिशत तक महंगी होने की उम्मीद है। व्हिस्की, रम, ब्रांडी और जिन जैसे इंडियन मेड फॉरेन लिकर (आईएमएफएल) की प्रति क्वार्टर बोतल पर ₹15 से ₹25 तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
शराब की कीमतों पर सरकार का है पूरा नियंत्रण
वर्तमान में, कर्नाटक में शराब की कीमतों पर राज्य सरकार का कड़ा नियंत्रण है। निर्माता अपनी एक्स-फैक्ट्री कीमतें घोषित करते हैं, जिसके आधार पर सरकार ही अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) निर्धारित करती है। शराब को कुल 16 मूल्य स्लैब में विभाजित किया गया है, और हर स्लैब पर एक अलग स्तर का अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगाया जाता है।
Excise duty से सरकार को होती है कितनी कमाई?
सबसे बड़ा असर पहले चार मूल्य स्लैब पर पड़ेगा, जिनकी राज्य के कुल Excise duty राजस्व में लगभग 80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इन्हें इस प्रकार संशोधित किया गया है: स्लैब 1 अब ₹80 से ₹95, स्लैब 2 ₹95 से ₹110, स्लैब 3 ₹120 से ₹135 और स्लैब 4 ₹150 से ₹170 तक हो गया है।
इस कैटेगरी के आधार पर एक पूरी बोतल का अधिकतम खुदरा मूल्य ₹50 से ₹100 तक बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, बार और रेस्तरां में शराब की कीमतें अतिरिक्त सेवा शुल्क के कारण और भी अधिक बढ़ सकती हैं।
उदाहरण के लिए, ब्लैक डॉग और ब्लैक एंड व्हाइट स्कॉच जैसी प्रीमियम आयातित स्पिरिट्स की कीमतों में 5 से 15 प्रतिशत की कमी देखी जा सकती है। वहीं, डीएसपी ब्लैक डीलक्स जैसी बजट इंडियन मेड फॉरेन लिकर (आईएमएफएल) 11 से 16 प्रतिशत महंगी होने वाली है। बीयर की कीमतों में भी मामूली बढ़ोतरी की उम्मीद है, खासकर ज्यादा अल्कोहल वाले तेज़ बीयर के वेरिएंट्स में।
नियमित बीयर अपेक्षाकृत स्थिर रह सकती है, लेकिन नई टैक्स संरचना के तहत यह पूरी तरह अप्रभावित रहने की संभावना नहीं है। कर्नाटक में लगातार हो रही मूल्य वृद्धियों ने उपभोक्ताओं और शराब व्यापारियों दोनों की कड़ी आलोचना को जन्म दिया है। कई लोगों का तर्क है कि ये बार-बार के संशोधन ग्राहकों पर भारी वित्तीय बोझ बढ़ा रहे हैं।
उपभोक्ताओं के एक वर्ग में यह धारणा भी बढ़ रही है कि बढ़ी हुई आबकारी वसूली का उपयोग सीधे तौर पर सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के समर्थन के लिए किया जा रहा है।












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