पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश फिर नाकाम? US से बात किए ही इस्लामाबाद से वापस लौटे ईरानी विदेश मंत्री
Iran US talks: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में संभावित बातचीत की उम्मीद उस समय कमजोर पड़ गई, जब ईरान का उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल बिना किसी अमेरिकी अधिकारी से मिले ही इस्लामाबाद से लौट गया। इससे साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच सीधे संवाद की राह आसान नहीं है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता कोशिश नाकाम?
Pakistan ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश की, लेकिन यह प्रयास फिलहाल सफल होता नहीं दिख रहा। ईरान की ओर से साफ कर दिया गया है कि वह सीधे तौर पर अमेरिका से बातचीत करने के पक्ष में नहीं है और अपनी बात तीसरे पक्ष के जरिए ही रखना चाहता है।

इस्लामाबाद दौरा और हाईलेवल मीटिंग फेल
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचे। यहां उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) से मुलाकात की। इस बैठक में इशाक डार (Ishaq Dar) और सेना प्रमुख सैयद आसिम मुनीर (Syed Asim Munir) भी मौजूद रहे। उन्होंने 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल युद्ध को समाप्त करने के संबंध में ईरान की मांगों और चिंताओं को भी साझा किया।बैठक में क्षेत्रीय हालात और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई, जिससे संकेत मिलता है कि वार्ता केवल अमेरिका-ईरान तनाव तक सीमित नहीं थी।

ईरान ने सीधे संवाद से किया इनकार
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Ismail Baghaei ने स्पष्ट किया कि इस समय ईरान और अमेरिका के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी चिंताओं को पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाएगा। साथ ही, उन्होंने अमेरिकी कदमों को "थोपा गया आक्रामक युद्ध" बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रखी हैं ये शर्ते
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि किसी भी समझौते के लिए ईरान को संवर्धित यूरेनियम छोड़ना होगा और strait of hormuz से तेल के मुक्त प्रवाह को सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि जब तक कोई समझौता नहीं हो जाता, अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखेगी।
नाकेबंदी कब हटेगी, इस पर ट्रंप ने कहा, "मुझे उस सवाल का जवाब बाद में देना होगा। मुझे देखना होगा कि वे क्या पेशकश कर रहे हैं।" उन्होंने ईरान के नेतृत्व में आंतरिक मतभेदों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। यह पूछे जाने पर कि अमेरिका किससे बात कर रहा है, ट्रंप ने किसी का नाम नहीं लिया और कहा, "मैं यह कहना नहीं चाहता, लेकिन हम उन लोगों के साथ काम कर रहे हैं जो अभी प्रभारी हैं।"













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