कांग्रेस ने ही तो नरेंद्र मोदी को बनाया देसी ओबामा!

[अजय मोहन] गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में अपने भाषण के अंत में चंद अंग्रेजी की लाइने बोल दीं, तो लोगों ने उन्‍हें भारत के ओबामा अथवा देसी ओबामा की संज्ञा दे डाली। दिग्विजय सिंह को यह बात इतनी ज्‍यादा नगवार गुजरी कि भड़ास निकालते हुए उन्‍होंने देसी के आगे एक शब्‍द जोड़ दिया 'फर्जी'। खैर फर्जी कौन है, यह हमारी चर्चा का विषय नहीं, लेकिन हां देसी ओबामा कौन हैं और कहां से आया, यह जरूर सोचने वाली बात है। और अगर आप मोदी को देसी ओबामा मान ही चुके हैं, तो सच पूछिए तो यह सब कांग्रेस की वजह से ही संभव हुआ है।

आप सोच रहे होंगे कि आखिर कांग्रेस में इतनी ताकत कहां से आयी कि मोदी को ओबामा बना दिया। जवाब यह है कि यह ताकत नहीं कमजोरी है। सीधे शब्‍दों में कहें तो देश में पिछले एक दशक में कांग्रेस का शासन है। अगर कांग्रेस ने पिछले 10 साल में भारत को अमेरिका के करीब पहुंचा दिया होता, तो शायद देश की जनता देसी ओबामा की खोज तो दूर, एक नजर उठाकर भी नहीं देखती। सच पूछिए तो जनता के जख्‍म इतने गहरे हो चुके हैं, कि अब उन्‍हें कोई एक ऐसा व्‍यक्ति चाहिये, जो उन पर मरहम लगा सके। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी की ओर से नई सोच नई उम्‍मीद का नारा लेकर नरेंद्र मोदी ने अपना चुनावी अभियान हैदराबाद से शुरू किया है। सच पूछिए तो पूरा देश उनकी तरफ एक आस भरी निगाहों से देख रहा है।

यहां पर हम कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के ट्वीट पर जाना चाहेंगे। उन्‍होंने लिखा, "अब हमें एक फर्जी देसी ओबामा मिल गया है और वो भी एक फेंकू के रूप में।" यहां दिग्विजय सिंह ने सीधे तौर पर मोदी पर वार किया है। चलिये एक बार हम मोदी को फेंकू मान भी लें, तो दिग्विजय उन मुद्दों को झुठला पायेंगे, जो मोदी ने हैदराबाद के लाल बहादुर शास्‍त्री स्‍टेडियम में उठाये। अगर मोदी फेकूं हैं, तो दिग्विजय की नजर में तेलंगाना में हर रोज हिंसा सही है, उत्‍तराखंड-यूपी, झारखंड-बिहार, मध्‍य प्रदेश-छत्‍तीसगढ़ के अलग होने पर भी हिंसा होनी चाहिये थी। अगर दिग्विजय सिंह को मोदी की हर बात फेंकने वाली लगती है, तो वो सभी व्‍यक्ति फेंकू हुए जो रुपये के नीचे गिरेने पर, चीन द्वारा घुसपैठ, पाकिस्‍तानियों द्वारा सरहद पर गो‍लीबारी, बांग्‍लादेश के रास्‍ते आतंकी घुसपैठ पर चिंता जताते हैं।

सच पूछिए तो दिग्विजय का ट्वीट तो महज एक खिसियाहट थी, कांग्रेस तो नरेंद्र मोदी को भारत का ओबामा मान चुकी है। कांग्रेस के समर्थक अगर मेरे इस लेख को बकवास मानते हैं, तो मैं उनसे सिर्फ एक सवाल पूछना चाहूंगा- क्‍या कांग्रेस में कोई नेता ऐसा है, जिसे सुनने के लिये लोग पांच रुपए देकर आयें? अगर है, तो कांग्रेस ईठ का जवाब पत्‍थर से क्‍यों नहीं देती?

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