शरद पवार सक्रिय राजनीति को कहेंगे अलविदा
मुंबई। देश की संसदीय राजनीति में लगभग पांच दशकों तक प्रभावी भूमिका निभाने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने अब सक्रिय राजनीति को अलविदा कहने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि वे 2014 के आम चुनाव में प्रत्याशी नहीं बनने जा रहे हैं। समाचार चैनल सीएनएन-आईबीएन को दिए गए साक्षात्कार के दौरान प्रधानमंत्री बनने के बारे में पूछे जाने पर पवार ने बड़ी बेबाकी से कहा कि वे ऐसे सपने नहीं देखते जो कभी सच न हो पाए। राज्य की राजनीति से लेकर देश की भावी सरकार की संभावनाओं पर पवार ने खुलकर बात की।
किसी गठबंधन सरकार का प्रधानमंत्री बनने की अपनी संभावना को खारिज करते हुए पवार ने कहा कि मैं लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ने जा रहा हूं। मैंने यह फैसला ले लिया है। दूसरा, मैं अपनी सीमाएं जानता हूं। प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वाले व्यक्ति को अपनी पार्टी से कम से कम 40 सांसद होना होना चाहिए। मेरी पार्टी इतनी संख्या में प्रत्याशी नहीं उतारने जा रही है। इसलिए हम जो साकार नहीं हो सकता वैसे सपने ही नहीं देखते।

आपातकाल लागू करने के कारण पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लोगों की नाराजगी को देखते हुए पवार ने कांग्रेस छोड़ दी थी। पवार वर्ष 1987 में कांग्रेस में वापस हुए थे, मगर सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाते हुए 1999 में उन्होंने फिर कांग्रेस छोड़ दी और पी.ए. संगमा के साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का गठन किया। वर्ष 2004 के आम चुनाव के बाद पवार संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी शामिल हुए।












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