रफ्तार के दीवानों के लिए बुरी खबर, भारत से छीन सकती है फॉर्मूला-1 की मेजबानी
नयी दिल्ली। रफ्तरा के दीवानों के लिए ये खबर अच्छी नहीं है। भारत से साल 2014 में फॉर्मूला वन रेस की मेजबानी छिन सकती है। फॉर्मूला वन आयोजन समिती ने माना है कि भारत में एफ-1 रेस का आयोजन करा पाना बहुत मुश्किल है। एफवन के कॉमर्शियल प्रमुख बर्नी एक्लेस्टोन के मुताबिक भारत में एफ-1 रेस कराना मुश्किल है क्योंएकि यहां सियासी दखलंदाजी की वजह से बाधा पैदा होती है।
उन्होंेने कहा कि 2014 से रूस में भी एफ-1 रेस शुरू हो रही है। ऐसे में उनके पास विकल्प और अधिक होंगे। भारत में इस खेल में सियासी दखलअंदाजी की वजह से हो सकता है कि 2014 से एफ-1 रेस नहीं हो पाए। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर ग्रां पी के आयोजन में आने वाली परेशानियों पर जबाव देने से बचते हुए एक्लेस्टोन ने कहा कि फिलहाल आगामी कैलेंडर के लिए 22 ग्रां पी रेस में हैं। इनमें से अधिकतम 20 ग्रां पी को हरी झंडी दी जा सकती है।

दरअसल एफ-1 के आयोजक अब एक साल में 20 रेस कराने के पक्ष में हैं और भारत में खेल के अंदर राजनीति का हस्तक्षेप और भारी भरकम टैक्स नियम इस फैसले के पीछे का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।
भारत में 2011 में पहली बार ग्रां पी का आयोजन हुआ था और इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली। इस साल 27 अक्टूबर को यहां एफ-1 का आयोजन किया जाएगा।
हालांकि आयोजको ने माना कि भारत में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट फार्मूला वन रेस के लिए चुनौतीपूर्ण ट्रैक है। मेजबानी छीनने की खबरों के बाद जेपी स्पोर्टस इंटरनेशनल ने एक बयान जारी कर कहा कि 2014 ग्रां पी के आयोजन को लेकर मीडिया में चल रही खबरें बिल्कुल निराधार है। उन्होंने कहा कि फॉर्मूला वन प्रबंधन के साथ हमारा समझौता है, जिसके मुतबिक 2015 तक बीआईसी पर एफ वन रेस करवाएगी।












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