भाजपा के लिए वोट बैंक नहीं आस्था का विषय है राम मंदिर
[अजय मोहन] भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने यह कहकर कि बहुमत में भाजपा आयी तो राम मंदिर का निर्माण जरूर होगा, एक नई बहस छेड़ दी है। कि आखिरकार भाजपा कि आधार पर चुनाव लड़ने जा रही है- मंदिर या विकास। हमारा जवाब है विकास, क्योंकि भाजपा का मुद्दा राम मंदिर नहीं होगा। असल में भाजपा के नेता समय-समय पर राम मंदिर बनाने की बात सिर्फ इसलिये करते हैं, ताकि उनके भगवा रंग और हिन्दूवादी विचारधारा का अहसास लोगों को होता रहे। बात अगर मंदिर की है, तो सच तो यह है कि भाजपा सत्ता में आये चाहे न आये, मंदिर बनाने वालों ने जिस दिन चाह लिया, उसके ठीक 25 से 30 दिन के भीतर अयोध्या में भव्य मंदिर तैयार हो जायेगा।
हम ऐसा इसलिये कह रहे हैं, क्योंकि अयोध्या के विवादित स्थल से दूर एक स्थान पर मंदिर के लिये पत्थर तराशे जा रहे हैं। मंदिर के लिये पत्थर बनाने के काम में हर रोज 150 से ज्यादा मजदूर काम कर रहे हैं। मंदिर का नक्शा भी तैयार किया जा चुका है। पत्थर तैयार होने पर सिर्फ सारे पत्थरों को सेट करना रहे जायेगा, यानी महीने भर के अंदर एक भव्यमंदिर आसानी से खड़ा हो जायेगा। खैर यहां हम आपको बता दें, कि जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट में है, तब तक भाजपा मंदिर निर्माण की दिशा में एक कदम नहीं बढ़ा सकती।

डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी की बात को आगे बढ़ायें तो उन्होंने कहा कि जिस तरह डा. राजेंद्र प्रसाद के समय में संविधान में संशोधन कर सोमनाथ मंदिर का निर्माण कराया गया था, उसी तरह भाजपा भी राम मंदिर बनवाएगी। वाजपेयी ने साफतौर पर कहा कि गठबंधन धर्म की मजबूरियों और पूर्ण बहुमत न मिलने की वजह से ही आज तक राम मंदिर नहीं बन पाया। वाजपेयी ने कहा, "राम मंदिर आस्था का विषय है। मंदिर आंदोलन की शुरुआत विश्व हिंदू परिषद ने की थी। बाद में पार्टी द्वारा यह नारा भी दिया गया कि रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। मंदिर वहां तभी स्थापित होता जब वहां का स्थान खाली होता। हिंदू समाज की वजह से ही वह स्थान खाली हो पाया है।" वाजपेयी ने कहा, "हिंदुत्व ही राष्ट्रवाद है, राष्ट्रवाद ही हिंदुत्व है। भारत माता के दुख में दुखी और सुख में सुखी होने वाला हर पंथ और धर्म का व्यक्ति राष्ट्रवादी हो सकता है।"
अब अगर आप यह सोच रहे हैं कि वाजपेयी के इस बयान से भाजपा का मुस्लिम वोट कट सकता है, तो हम आपको बता दें कि भाजपा का मुस्लिम वोट जितना है, उसे काटना बेहद मुश्किल है। असल में मुस्लिमों में ऊपरी तबके के शिया मुसलमान ही भाजपा के वोटबैंक में शामिल हैं। बाकी के मुसलमान कांग्रेस और सपा की ओर खिंच चुके हैं। ऊपरी तबके के पढ़े लिखे मुसलमान देश के विकास के बारे में ज्यादा सोचते हैं। वो धर्म के नाम पर कभी वोट नहीं देते। लिहाजा ऐसे बयानों से भाजपा का वोटबैंक टस-मस नहीं होने वाला।












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