मोदी बनाम राहुल : आंधी में जला दीप, पानी में लगी आग!

अहमदाबाद। दिल अपना और प्रीत पराई... किसने है ये रीत बनाई... आंधी में एक दीप जलाया और पानी में आग लगाई... फिल्म दिल अपना और प्रीत पराई का यह प्रसिद्ध शीर्षक गीत आज भारतीय राजनीति में नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी के संदर्भ में सटीक बैठता दिख रहा है।

यह गीत यूँ ही याद नहीं आ गया, बल्कि इसके पीछे देश में लोकसभा चुनाव 2014 से पहले चल रहे सर्वेक्षण और निष्कर्ष हैं। सबसे ताजा सर्वेक्षण कल सामने आया। सर्वेक्षण का सार तो नया नहीं था। हाँ आँकड़े जरूर ऊपर-नीचे हुए हैं और इन्हीं आँकड़ों ने इस गीत की पंक्ति की न केवल याद दिला दी, बल्कि उसे थोड़ा-सा उलट-पुलट कर ‘आंधी में जला दीप, पानी में लगी आग' करने पर विवश कर दिया।

modi-rahul

सीएनएन-आईबीएन की ओर से कराए गए ताजा सर्वेक्षण के अनुसार नरेन्द्र मोदी फिर एक बार प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे बताए गए हैं, तो राहुल गांधी को दूसरे स्थान पर दर्शाया गया है। यहाँ सर्वेक्षण या उसके आँकड़ों को दोहराने का कोई इरादा नहीं है, परंतु सर्वेक्षण के निष्कर्ष जरूर चौंकाने वाले दिखाई दे रहे हैं।

मोदी की चौगुना छलांग
सर्वेक्षण को महज आँकड़ों की दृष्टि से लिया जाए, तो नरेन्द्र मोदी को देश की 19 प्रतिशत जनता प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है और इस दौड़ में वे सबसे आगे हैं, जबकि राहुल गांधी को 12 प्रतिशत लोग प्रधानमंत्री के रूप में पसंद करते हैं। 2011 के मुकाबले देखें, तो मोदी को 2011 में केवल 5 प्रतिशत लोग प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते थे, जबकि राहुल उस समय 19 प्रतिशत के साथ सबसे आगे थे। अब इन आँकड़ों की गहराई में उतरा जाए, तो स्पष्ट है कि मोदी ने दो या तीन नहीं, बल्कि चार गुना ऊँची छलांग लगाई है। पहली बात तो यह है कि दो ही वर्षों में मोदी को पीएम के रूप में पसंद करने वालों का प्रतिशत 14 तक बढ़ गया। यह मोदी की डेढ़ गुना छलांग हुई। दूसरे उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी राहुल के ग्राफ में 7 प्रतिशत की कमी आई। यह मोदी की दूसरी छलांग है। सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस के उपाध्यक्ष व पार्टी में नंबर दो का स्थान रखने के बावजूद राहुल के ग्राफ में गिरावट मोदी की तीसरी छलांग है और भाजपा में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में अभी तक घोषित नहीं किए गए नरेन्द्र मोदी ने मात्र प्रचार समिति का अध्यक्ष बन कर ही 14 फीसदी की बढ़त बनाई, जो उनकी चौथी छलांग है।

आंधी की उपज
अब सवाल यह उठता है कि क्या केवल विकास ही है, जो नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता में तेजी से इजाफा कर रहा है? शायद उत्तर ना में ही आएगा। दरअसल नरेन्द्र मोदी उस आंधी की उपज हैं, जो पिछले बारह वर्षों से उनके खिलाफ नफरत के रूप में चल रही है। गोधरा से लेकर गांधीनगर, गुजरात से लेकर दिल्ली और यूरोप-जापान से लेकर अमरीका-ब्रिटेन तक फैलाई गई नफरत ही उन्हें लोगों में प्रिय बनाती जा रही है। स्वयं मोदी कह चुके हैं कि नफरत की शिलाओं को उन्होंने अपनी प्रगति की सीढ़ी बनाया है। नफरत का यह सिलसिला आज भी अमर्त्य सेन से लेकर मार्कण्डेय काट्जू तक जारी है। इस नफरत ने न केवल मोदी रूपी दीये को प्रज्वलित किया, बल्कि ज्यों-ज्यों नफरत की आंधी बढ़ी, त्यों-त्यों यह दीया विचलित या कम्पित होने के बजाए ज्यादा रौशन होता चला गया।

और पानी में आग
कल जब मोदी को लेकर सीएनएन-आईबीएन पर चर्चा चल रही थी, तो कुछ बुद्धिजीवियों की दलीलों से लग रहा था, जैसे पानी में आग लग गई हो। बहस में बैठे कुछ बुद्धिजीवी ऐसी दलीलें दे रही थीं, जिससे साफ था कि उन्हें मोदी की लोकप्रियता मानो हजम नहीं हो रही थी। या संभव है कि वे खुद को तटस्थ दिखाने की कोशिश में मोदी की लोकप्रियता हजम नहीं कर पा रहे थे। कुछ तर्की बुद्धिजीवी मोदी की इस लोकप्रियता को अटल बिहारी वाजपेयी की लोकप्रियता के मुकाबले मापने की कोशिश कर रहे थे, परंतु शायद वे भूल गए थे कि न तो वाजपेयी ने एक दशक तक किसी नफरत की आंधी का सामना किया था और न ही राहुल गांधी पिछले पाँच वर्षों में ऐसी किसी आंधी से रू-ब-रू हुए हैं। इतनी घृणा के बावजूद यदि मोदी लोकप्रियता की सीढ़ी इतनी तेजी से चढ़ें, तो फिर उनके विरोधियों के लिए तो पानी में आग लगने समान बात ही हुई न।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+