बिहार पर बारिश नहीं संकट के बादल

पटना। बिहार के 16 से ज्यादा जिलों के किसानों को एक बार फिर सूखे की चिंता सताने लगी है। बारिश की कमी के कारण किसान जहां उमड़ते-घुमड़ते बादलों की तरफ टकटकी लगाए हुए हैं, वहीं सरकार भी इस स्थिति से निपटने की तैयारी में जुट गई है। इस वर्ष मानसून आने के बाद हुई बारिश से किसानों को खुशी का ठिकाना नहीं था। किसानों को आस बंधी थी कि इस वर्ष मानसून दगा नहीं देगा। परंतु एक महीने के बाद बारिश की कमी ने यहां के किसानों को अपनी नियति को कोसने के लिए बाध्य कर दिया है।

कृषि विभाग के अनुसार अगर एक सप्ताह के अंदर झमाझम बारिश नहीं हुई तो राज्य में चावल उत्पादन का आंकड़ा 30 से 35 प्रतिशत नीचे गिर जाएगा। आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अब तक मात्र 30 प्रतिशत ही धान की रोपनी हो पाई है। राज्य में इस वर्ष 34 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपनी का लक्ष्य रखा गया है, परंतु अब तक 10.98 लाख हेक्टेयर भूमि पर ही धान की रोपनी हो सकी है।

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राज्य में 16 जिले ऐसे हैं, जहां बारिश की स्थिति काफी खराब है। इस कारण धान की रोपनी प्रभावित हुई है। कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बक्सर और औरंगाबाद में 25 से 30 प्रतिशत रोपनी हुई है, जबकि गया में 2.37 प्रतिशत, नालंदा में 0.99 प्रतिशत, नवादा में 0.24 प्रतिशत जमुई में 1.57 प्रतिशत, जहानाबाद में 5.02 प्रतिशत रोपनी की गई है। सहरसा, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी जिलों में रोपनी की स्थिति संतोषजनक बताई जा रही है।

पटना मौसम विभाग के निदेशक ए़ क़े सेन ने आईएएनएस को बताया कि पूरे बिहार में जुलाई तक 426 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, परंतु अब तक 330 मिलीमीटर बारिश ही हुई है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर बारिश उत्तरी बिहार के जिलों में हुई है, जबकि दक्षिण बिहार के ज्यादातर जिलों में नाममात्र की बारिश हुई है। उन्होंने अनुमान जताया है कि मानसून में अब सुधार की संभावना नहीं है तथा बिहार में अभी मानसून कमजोर बना रहेगा।

कृषि वैज्ञानिक डॉ़ एस़ एऩ सिंह का कहना है कि धान की रोपनी का मुख्य समय 15 से 30 जुलाई है। इसके बाद रोपनी होने से हर प्रभेद में उत्पादन की क्षमता 30 से 35 प्रतिशत घट जाती है। इस वर्ष सरकार ने चावल का उत्पादन का लक्ष्य 95 लाख टन रखा है। इस प्रकार देर से रोपनी होने पर संभवत: 28 लाख टन से ज्यादा उत्पादन घटने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

मानसून की बेरुखी से किसानों के सामने विकट समस्या उत्पन्न हो गई है। अनावृष्टि के कारण किसान और किसानों के परिजनों के माथे पर चिन्ता की लकीरें उभर आई हैं। भोजपुर के समृद्घ किसान अखिलेश सिंह कहते हैं कि 'धान का कटोरा' कहे जाने वाले इन क्षेत्रों में कई किसानों के खेतों में धान का बीचड़ा नहीं पड़ा है। वह स्पष्ट करते हैं अगर स्थिति यही रही तो किसान पलायन करने लगेंगे। नहरों में पानी नहीं है। खेतों में धूल उड़ रहे हैं। आकाश का सूनापन देख किसानों के माथे पर लकीरें गहरी होती जा रही हैं। अब आस भी टूटती जा रही है। वह कहते हैं कि अब तक इस जिले में सात से 10 प्रतिशत रोपनी हो पाई है, वह भी यह आंकड़ा समृद्घ किसानों के कारण है।

राज्य के कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह ने आईएएनएस से कहा कि स्थिति से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। विभाग ने किसानों को सिंचाई के लिए डीजल पर अनुदान देने की घोषणा की है। एक एकड़ के लिए 10 लीटर डीजल पर अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। 25 रुपये प्रति लीटर की दर से अनुदान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष डीजल की कीमत बढ़ने के कारण अनुदान राशि बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। सिंह के मुताबिक डीजल अनुदान के लिए सरकार ने 769 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है। वह मानते हैं कि मानसून की बेरुखी के कारण चावल उत्पादन में गिरावट आएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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