प्रत्याशी घोषित होते ही जोड़े जाएं एमपी-एमएलए के चुनावी खर्चे

ठाकुर ने अपनी याचिका में यह दलील दी है कि पहले प्रत्याशियों के नाम चुनाव की घोषणा होने के बाद सामने आते थे, लेकिन अब कई पार्टियों द्वारा आधिकारिक रूप से प्रत्याशी पहले ही घोषित कर दिए जाते हैं। ये प्रत्याशी चुनाव घोषित होने से पहले ही बहुत भारी खर्च करते हैं, जिसका कोई लेखा-जोखा नही होता है। कई बार तो ये प्रत्याशी निर्धारित धनराशि से कई गुना खर्च करते हैं।
याचिकाकर्ता ने चुनाव सम्बंधित जन अधिनियम 1950 तथा 1951 तथा निर्वाचन संचालन नियमावली 1961 सहित विभिन्न कानूनों को आधार बनाते हुए उच्च न्यायालय से भारत निर्वाचन आयोग को यह निर्देश देने की प्रार्थना की है कि चुनावों में शुचिता और चुनावी खर्च में नियंत्रण हेतु यह आवश्यक है कि जैसे ही किसी प्रत्याशी का नाम घोषित किया जाए, वैसे ही वह अपने चुनावी खर्च का हिसाब रखना शुरू कर दे, साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी भी उस पर नजर रखें।












Click it and Unblock the Notifications