बोफोर्स घोटाले के राज दफन, मुख्य आरोपी क्वात्रोकी की इटली में मौत

इस सौदे में भारत सरकार ने स्वीडन की एक कंपनी एबी बोफोर्स से 155 एमएम की 410 होवित्जर बोफोर्स तोपें खरीदी थीं। सौदे में दलाली के आरोपों पर सीबीआई ने 22 जनवरी 1990 में केस दर्ज किया था। हालांकि सीबीआई ने क्वात्रोकी के खिलाफ कार्रवाई की हर संभव कोशिश की थी मगर कामयाबी नहीं मिली। सीबीआई ने उसके प्रत्यर्पण के लिये भी हर संभव प्रयास किया मगर हाथ मलकर रह गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर क्वात्रोकी को बचाने का आरोप लगा था।
वर्ष 2002 में क्वात्रोकी के भारत प्रत्यर्पण की सीबीआई की पहली कोशिश मलेशिया में नाकाम रही। उसके बाद क्वात्रोकी 2007 में इंटरपोल के वारंट के आधार पर अर्जेंटीना में हिरासत में लिया गया था लेकिन सीबीआई की आधी अधूरी तैयारियों के चलते क्वात्रोकी का भारत प्रत्यर्पण नहीं हो सका। दोनों बार क्वात्रोकी बच निकला और सीबीआई हाथ मल कर रह गई।
हैरानी की बात तो ये कि 19 साल तक अदालत में मामला चलाने के बाद 2009 में सीबीआई ने क्वात्रोची पर चल रहा मामला बंद करने की सिफारिश की जिसके बाद दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने साल 4 मार्च 2011 को क्वात्रोकी को रिश्वतखोरी के मामले से बरी कर दिया। कांग्रेस पर भी क्वात्रोकी को बचाने के आरोप लगते रहे हैं। जानकर मानते हैं कि क्ववात्रोकी की मौत के बाद भी सियासी फायदे के लिये बोफोर्स का मुद्दा जिंदा रहेगा।












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