'पिल्ले' पर बवाल, ये है नरेंद्र मोदी की कामयाब चाल
[नवीन निगम] आखिरकार नरेंद्र मोदी जो चाहते थे वही हुआ, मोदी ने गुजरात से तोप का एक गोला दागा और वह छा गए। उन्होंने एक तीर से दो नहीं तीन शिकार कर लिए। पहला उन्होंने यह जांच लिया कि उनकी लोकपियता कितनी हैं। मीडिया में जिस तरह उनके बयान को तरजीह दी गई उससे उन्होंने अपनी लोकप्रियता के पैमाने को जांच लिया। यहीं नही उन्होंने इतना स्पष्ट बोलकर कि वह हिंदू राष्ट्रवादी हैं भाजपा के परम्परागत वोटर को खुश कर दिया। यहां तक की शिवसेना को उनके इस बयान का समर्थन करना पड़ा।
दूसरा इतना खरा बोलकर उन्होंने मतदाताओं को एक संदेश दिया कि वह निर्णय लेने में हिचकते नहीं है और भाजपा के अन्य नेताओं की तरह वह अपने को हिंदू राष्ट्रवादी या संघ से अपने संबंधों को छुपाते नहीं उल्टा उसपर गर्व महसूस करते हैं। तीसरा उन्होंने चुनाव प्रचार किस धुरी के आसपास घूमेगा इसका साफ संदेश भाजपा कार्यकर्ताओं को दिया। जिससे भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में वैचारिक स्तर पर कोई उहापोह नहीं रहे और वह राजनैतिक मंचों या वाद विवाद में क्या कहना है इसे ठीक प्रकार समझ जाए।
नरेंद्र मोदी ने अपने को हिंदू राष्ट्रवादी कहकर वोटरों को साफ संदेश दिया है कि भाजपा हिंदू राजनीति पर चलेगी लेकिन वह विकास और गर्व से कहो हम हिंदू के नारे के आसपास रहेगी। राम मंदिर के मुद्दे को वह अपना हथियार नहीं बनाएंगी। हां मंदिर के प्रश्न पर वह साफ कहेंगी कि पार्टी भव्य मंदिर चाहती हैं, लेकिन उसपर ज्यादा तूल नहीं देंगी। एक खास बात यह है कि मोदी ने 2002 के दंगों को जानबूझकर छेड़ा है। अब कांग्रेस इस पर हल्ला करेंगी तो दो से तीन दिन के भीतर मोदी का माइनॉरिटी विजन डाक्यूमेट सामने आ जाएगा। जिसमें देश में कब-कब दंगे हुए उन दंगों में कितने मुसलमान मारे गए। उन पर बनी जांच रिपोर्टो का क्या हुआ आदि बातें होगी।
मोदी इन बातों से कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करेंगे और इससे देश में एक नया वाद-विवाद शुरू हो जाएगा। क्योंकि मोदी के इस डाक्यूमेंट से सपा, बसपा और तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियां खुश हो जाएंगी जो कांग्रेस से अल्पसंख्यक वोट झटकने की ताक में रहती है। यह मोदी के डाक्यूमेंट को राजनीति से प्रेरित बताएंगी लेकिन उसमें कांगे्रस पर उठाए गए सवालों का जवाब भी कांग्रेस से मांगेगी। काग्रेस जहां एक तरफ भाजपा और मोदी के हमलों से आहत होगी वहीं सपा जैसी अन्य सेक्यूलर पार्टियां कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं।
मोदी ने जानबूझकर इस साक्षात्कार में वो बातें उठाई है जिनसे देश में दंगों को लेकर एक बहस चल पड़े और मोदी को कहने को मिल जाए कि भाजपा शासित प्रदेशों में दंगें आखिर क्यों नहीं हो रहे हैं। इसके बाद ही वह यूपी में सपा शासनकाल में हुए दंगों का जिक्र भी कर सकेंगे। जो उनका सपा पर सीधा हमला होगा। मोदी का लक्ष्य साफ है कि वह किसी भी प्रकार से अपने या भाजपा के खिलाफ मुस्लिम वोटों का ध्रवीकरण न होने दे।













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