उपहार अग्निकांड: 16 साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ
नई दिल्ली। उपहार सिनेमा अग्निकांड मामले की आज 16 वीं बरसी है। दिल दहला देने वाले इस हादसे में 59 लोगों की जलने से मौत हो गई थी। मारे गए निर्दोष बच्चों, युवाओं व बजुर्गों के परिजन आज भी न्याय पाने के लिए निचली अदालत से सर्वोच्च न्यायालय के चक्कर काट रहे हैं।
आज से ठीक 16 वर्ष पहले दिल्ली में हुए उपहार सिनेमा अग्निकांड में अपने प्रियजनों को खो चुके 28 परिवारों ने श्रद्धांजलि देने के लिए गुरुवार को एक बैठक की और न्याय के लिए अपना संघर्ष जारी रखने की शपथ ली। त्रासदी पीड़ितों के शोकाकुल परिवार के सदस्य दक्षिणी दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में बंद हो चुके उपहार सिनेमाघर के नजदीक बने स्मृति स्थल पर आंखों में आंसू लिए हुए एकत्रित हुए और प्रियजनों की याद में मोमबत्तियां जलाईं।

आज से 16 वर्ष पहले 13 जून 1997 को हिंदी फिल्म 'बॉर्डर' के प्रदर्शन के दौरान सिनेमाघर में आग लग गई थी, जिसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी और भगदड़ के कारण 100 अन्य लोग घायल हो गए थे। एसोसिएशन ऑफ विक्टिम्स ऑफ द उपहार ट्रैजेडी' (एवीयूटी) ने त्रासदी की बरसी के अवसर पर प्रार्थनासभा का आयोजन किया था। त्रासदी में अपने दो बेटों को खो चुकीं एसोसिएशन की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने कहा, "हमें न्याय देने में कानून पिछले 16 वर्षो से असफल है।
न्याय के लिए मेरी सारी गुहार बहरों के कान से टकरा कर रह जा रही है।" उन्होंने आगे कहा, "यह नागरिकों का नहीं, बल्कि न्यायालय की जिम्मेदारी है कि सबको न्याय मिले। अब समय आ गया है कि न्यायालय आरोपियों पर सख्त कार्रवाई करे, अन्यथा देश की न्याय व्यवस्था से लोगों का विश्वास उठ जाएगा।" पीड़ितों के परिवार वालों ने कहा कि दिवंगतों की आत्मा को न्याय के बिना शांति नहीं मिलेगी।
दिल्ली की एक निचली अदालत ने लापरवाही बरतने के आरोप में नवंबर 2007 को सिनेमाघर के मालिकों सुशील अंसल और गोपाल अंसल को दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई, जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2008 में घटाकर एक वर्ष कर दिया। पीड़ितों के परिवार वालों का कहना है कि इतनी मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों को दी गई सजा पर्याप्त नहीं है। एसोसिएशन ने कहा कि जब तक आरोपियों को उचित सजा नहीं मिल जाती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।












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