कारों की रोशनी के बीच उड़ा था हेलीकॉप्‍टर, तब बची थी शुक्‍ला जी की जान

रायपुर। नक्सल प्रभावित इलाके में घुप अंधेरे के बीच वायुसेना का हेलीकॉप्टर उड़ाने के लिए एहतियातन चॉपर के चारों तरफ कारों का घेरा बनाया गया, ताकि हेलीपैड के आसपास देखने लायक पर्याप्त रोशनी हो जाए। उसके बाद बड़ा जोखिम उठाकर पायलट ने हेलीकॉप्टर उड़ाया और शुक्ल को रायपुर लाया। गौरतलब है कि सामान्य परिस्थितियों में वायुसेना के हेलीकॉप्टर दिन ढलने के बाद उड़ान नहीं भरते। जगदलपुर में रात में लैंडिंग या टेक ऑफ करने की भी सुविधा नहीं है।

बताया जाता है कि जगदलपुर के महारानी अस्पताल में उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। घायल शुक्ल का पेट फूलता जा रहा था। अस्पताल में ऐसी सुविधाएं भी नहीं थी कि डॉक्टर उनके पेट फूलने की वजह तत्काल मालूम कर सकें। स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी। उनकी स्थिति को देखते हुए वहां उनका ऑपरेशन कर गोलियां निकालना भी चिकित्सकों को बेहद कठिन नजर आ रहा था। वरिष्ठ सर्जन डॉ. संदीप दवे हालांकि वहां पहुंच चुके थे। उनकी देखरेख में ही डॉक्टरों की टीम इलाज में जुटी थी।

Congress Leader VC Shukla
इसके बावजूद घायल शुक्ल की उम्र और जगदलपुर में अधूरी चिकित्सकीय सुविधा से डाक्टरों की चिंता पल-पल बढ़ती जा रही थी। इस बीच डॉक्टरों ने शासन के आला अफसरों को पूरे हालात की जानकारी दी। शासन के प्रतिनिधियों ने डॉक्टरों से इसका विकल्प पूछा। डॉक्टरों ने सुझाव दिया कि उन्हें तुरंत रायपुर ले जाना पड़ेगा। उस समय रात के एक बज रहे थे। शासन और चिकत्सकों ने काफी देर तक सोच विचार करने के बाद यह तय किया कि उन्हें बेहतर इलाज के लिए तुरंत राजधानी लाया जाए।

सड़क मार्ग से 300 किलोमीटर दूर राजधानी ले जाया नहीं जा सकता था, और रात में हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भरते। ऐसे में सबसे बड़ी दुविधा यह थी कि शुक्ल को आखिर कैसे ले जाया जाए। शासन-प्रशासन के जिम्मेदार लोगों ने वायुसेना के हेलीकॉप्टर पायलट से चर्चा की। उसे पूरे हालात की जानकारी दी गई। सेना का पायलट आखिरकार शुक्ल की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर रात में हेलीकॉफ्टर उड़ाने को तैयार हो गया। बाद में शुक्ल को दिल्ली के समीप गुड़गांव के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल मेदांता मेडिसिटी लाया गया। उनका आपरेशन कर तीनों गोलियां निकाली गईं। 84 वर्षीय शुक्ल का इलाज कर रहे चिकित्सकों का कहना है कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता की हालत में सुधार है, लेकिन अभी भी उन्हें खतरे से बाहर नहीं कहा जा सकता।

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