नवाज़ शरीफ के सामने 10 बड़ी चुनौतियां
नयी दिल्ली। पाकिस्तान में चुनाव और उसके नतीजों के बाद एक बात तो साबित हो गई कि पाकिस्तान में लोकतंत्र के पर्व में जनता की ऐतिहासिक और भारी भागीदारी रही है। तालिबान के फरमान की परवाह किए बगैर लोगों ने भारी संख्या में चुनाव में हिस्सा लिया। पाकिस्तान की आवाम के इस जोश ने लोकतंत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाया है।
यह चुनाव और इसके नतीजे तालिबान की हार हैं। पाक की जनता ने नवाज शरीफ को अपना प्रधानमंत्री चुना है। लेकिन तीसरी बार पाकिस्तान की गद्दी पर हुकूमत करने वाले नवाज के सामने चुनौतियां भी कम नहीं है। अगर देखा जाए तो नजाव शरीफ के लिए ना केवल पड़ोसी मुल्कों से संबंध बनाने की अंदरुनी चुनौतियां भी कम नहीं है।

नवाज की चुनौतियां-
- नवाज तालिबान और कट्टरपंथी जमात से कैसे निबटेंगे?
- ऊर्जा संकट और ख्सताहाल अर्थव्यवस्था कैसे संभालेगे?
- तालिबान से मध्यस्थता करेंगे या नहीं?
- भारत के साथ पाकिस्तान के संबंधों को पटरी पर कैसे लायेंगे?
- अमेरिका के साथ आने वाले समय में पाकिस्तान के रिश्ते कैसे होंगे?
- फौज और सुप्रीम कोर्ट के रवैये का सामना कैसे करेंगे?
- देश के अंदर आंतकी संगठनों पर पाबंदी कैसे लगायेंगे?
- पिछली सत्ता में हुई गलतियों को वो कैसे सुधारेंगे?
- कैसे खोजेंगे सेना का नया चीफ?
- आईएसआई और अन्य सरकारी एजेंसियों में विरोध से कैसे निबटेंगे?
नवाज शरीफ के आलोचक उन्हें पंजाब प्रांत का नेता मानते हैं, लेकिन उन्हें इन सब आलोचनाओं को गलत साबित करते हुए पाकिस्तान को एक बेहतर कल की ओर ले जाना है।












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