बॉर्डर पर भारतीय एयरबेस से खतरा महसूस कर रहा चीन

[नवीन निगम] दौलत बेग ओल्डी में चीनी सेना 19 किमी तक बेवजह या नादानी से नहीं घुसी है, वह इसकी तैयारी कई वर्षों से कर रही थी। भारत और चीन दोनों ही देशों के पास बड़ी सेनाएं है और चीन की थल सेना और भारत की थल सेना में संख्या के हिसाब से मामूली अंतर है, लेकिन एयरफोर्स में भारत चीन से बहुत आगे है। चीन ने कुछ साल पहले जब सीमा तक सड़कें बनाना शुरू किया तो भारत ने चीन की सीमा पास अपनी तीन हवाई पट्टियों का निर्माण करके चीन को चिढ़ा दिया। क्योंकि चीन जानता है कि भारतीय वायु सेना यदि सीमा के इतने नजदीक होगी तो लड़ाई के समय वह सारा खेल बिगाड़ देगी।

दौलत बेग ओल्डी में ताजा चीनी घुसपैठ इसी दबाव का एक हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन भारतीय सेना जिस रणनीति पर चल रही है वह बिलकुल सही है। पहले भारत विश्व में चीन को हमलावर साबित करना चाहता है उसके बाद भी चीन यदि नहीं माना और भारतीय सेना ने सीमित कार्रवाई की तो भारत के खिलाफ विश्व समुदाय नहीं जाएगा और चीन की ही किरकिरी होगी।

जो ताजा रिपोर्ट आई है उनमें कहा गया है कि चीनी सेना दौलत बेग ओल्डी में भारतीय सेना को उकसाना चाहती है। जिससे भारतीय सेना प्रतिवाद करें और चीनी सेना और आगे तक बढ़ जाए। क्योंकि दौलत बेग ओल्डी से वायुसेना की हवाई पट्टी महज 25 किलोमीटर भीतर बनी है और 19 किमी. अंदर चीनी सेना पहले ही आ चुकी है। इस पट्टी पर चीनी सेना की दृष्टि तो पहले से है, लेकिन यह तब और भी तीखी हो गई है जबसे भारतीय वायुसेना ने युद्धाभ्यास में इस पट्टी का इस्तेमाल किया है।

भारत द्वारा पाक और चीन दोनों ही सीमाओं पर एक साथ किए गए युद्धाभ्यास में वायुसेना ने लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी हवाई पट्टी ही नहीं बल्कि अरुणाचल प्रदेश में हाल में चालू किए गए अपने सभी एडवांस लैंडिग ग्राउन्ड्स का इस्तेमाल कर चीन को चुनौती दी थी। चीनी सेना इस युद्धाभ्यास को चुनौती और उकसाने के रूप में देख रही है।

पहली और दूसरी फ्लैग मीटिंग के असफल होने बाद भारतीय सेना ने शुक्रवार को तीसरी फ्लैग मीटिंग का प्रस्ताव चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को भेजा है, जिस पर चीनी सेना तवज्जो नहीं दे रही है। दरअसल दौलत बेग ओल्डी में कब्जा जमाए बैठी चीनी सेना वहां से हटने का नाम नहीं ले रही। चीन सरकार तो इसे भारतीय क्षेत्र में चीनी सेना का अतिक्रमण भी मानने को तैयार नहीं है।

इधर भारत की तरफ से सेना को सशोमा और श्योक नदी के पास तैनात किया गया है, जो आदेश मिलने पर फौरन दौलत बेग क्षेत्र की ओर कूच कर जाएगी। उसकी मदद के लिए मध्यम हल्के विमान भी तैनात किए गए हैं। इसके अतिरिक्त अत्याधुनिक सर्विलांस उपकरण भी तैनात करने की प्रक्रिया चल रही है। दौलत बेग इलाके में आईटीबीपी की गुरिल्ला युद्ध में दक्ष टुकड़ी को तैनात किया गया है।

दरअसल सेना की यह रणनीति है कि चीन सीमा पर सेना का जमावड़ा बढ़ाया जाए जिससे चीन समझ जाए कि दौलत बेग ओल्डी से वापस न आने पर भारत जंग तक जा सकता है। क्योंकि अतिक्रमण चीन की सेना ने किया है इसलिए वार्ता का नाटक कर भारतीय सेना अपनी स्थिति को मजबूत कर लेना चाहती है। इसके अलावा जंग लडऩे से पहले सेना इस बात को पुष्ट कर लेना चाहती है कि दौलत बेग ओल्डी में जहां उसकी हवाई पट्टी है उस पर चीन किसी प्रकार भी कब्जा या उसे नुकसान न पहुंचा सके।

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