सीमा पर घुसपैठ कर चीन ले रहा भारत की परीक्षा
[नवीन निगम] कहते हुए मन बड़ा दुखी होता है, लेकिन हमने इतिहास से कुछ नहीं सीखा। चीन बड़ा देश है उसकी सेना हमसे बीस होगी लेकिन हम अपने को अंतरराष्ट्रीय मामलों में इतना कमजोर क्यों प्रदर्शित करते हैं। आठ दिन पहले चीनी सेनाएं भारतीय सीमा में करीब 10 किलोमीटर तक घुस आई थीं और आठ दिन गुजर जाने के बाद भी वह लद्दाख़ के दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में बड़े मजे से बैठे हैं। हम क्या कर रहे हैं वार्ता। जबकि उनका विदेश विभाग साफ कह चुका है कि कोई अतिक्रमण चीन की फौज ने नहीं किया। दरअसल चीन भारत के हौंसले को देखना चाहता हैं।
दौलतबेग में 10 किमी. अंदर आकर चीन को कुछ खास नहीं मिलने वाला लेकिन वह भारत की नई ताकत की परीक्षा लेना चाहता है। दरअसल घुसपैठ तो वह बाद में करेगा। क्योंकि वह यह देखना चाहता है कि उसकी छोटी सी हरकत पर यदि भारत अपना रूख कड़ा कर लेता है तो वह भविष्य में अपनी योजना में परिवर्तन करेगा।

ज्ञात हो कि चीन ने 1962 की जंग में भी यही रणनीति अपनाई थी। दरअसल चीन भारत में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव से बहुत परेशान है। इसके अलावा भारत में अमेरिकी निवेश (क्योंकि भारत में लेबर सस्ता हैं) से भी वह परेशान दिख रहा है। अमेरिका की कंपनियां भारत में यदि सस्ते में माल तैयार कर लेती है तो वह चीन को इस क्षेत्र में कड़ी टक्कर दे सकती है। अमेरिका इराक से लेकर अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अपनी जड़े जमा चुका है। भारत के रूस की तरफ झुकाव होने से अमेरिका थोड़े समय पहले तक भारत को मित्र देश के रूप में नहीं देखता था लेकिन अमेरिका द्वारा भारत को लगातार दी जा रही अहमियत से अब चीन बहुत चिंतित है।
हल्की घुसपैठ करके वह देखना चाहता है कि भारत और अमेरिका की दोस्ती कितनी परवान चढ़ी है। चीन यदि दौलत बेग से अपनी सेना पीछे नहीं हटाता है तब भारत की तरफ से अमेरिका इस पर क्या बयान देता है चीन उसे देखना चाहता है। इसलिए इंतजार कीजिए दुनिया की ठेकेदारी संभालने वाले अमेरिका के बयान का। चीन
अमेरिकी बयान के बाद ही पीछे हटेगा।












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