बेनजीर हत्याकांड में मुशर्रफ की जमानत याचिका खारिज

मामले की जांच कर रही संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने यह कहते हुए जमानत याचिका का विरोध किया था कि बेनजीर की हत्या के सिलसिले में उसे पूछताछ के लिए मुशर्रफ की हिरासत की आवश्यकता है। एफआईए के अभियोजकों ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा कि वे मुशर्रफ को हिरासत में लेने के लिए आतंकवाद-रोधी अदालत में पेश करेंगे। उन्होंने कहा कि जांचकर्ताओं के पास इस बात के ठोस साक्ष्य हैं कि मुशर्रफ ने इस घटना को सहायता दी थी और इसे भड़काया था। इसलिए अदालत के पास मुशर्रफ की अंतरिम जमानत रद्द करने की उनकी अपील स्वीकार करने के वैध आधार थे।
लाहौर उच्च न्यायालय ने जब मुशर्रफ की जमानत अवधि में विस्तार की याचिका पर सुनवाई शुरू की तो उनके दो वकील अदालत में पेश नहीं हो सके। न्यायालय ने एक घंटे तक इंतजार किया, लेकिन वे फिर भी पेश नहीं हुए। बाद में एक महिला वकील मुशर्रफ की ओर से पेश हुई, लेकिन जब न्यायालय ने उनसे मुशर्रफ की पैरवी करने के लिए 'पॉवर ऑफ अटॉर्नी' मांगी तो वह इसे पेश करने में नाकाम रहीं।
एफआईए के वकीलों ने न्यायालय से कहा कि तत्कालीन राष्ट्रपति मुशर्रफ को इस मामले में औपचारिक तौर पर अब तक शामिल नहीं किया गया है। वे जानना चाहते हैं कि उनकी सरकार बेनजीर को आवश्यक सुरक्षा मुहैया कराने में क्यों विफल रही? न्यायाधीश हबीब-उर-रहमान ने एफआईए को जांच पूरी करने और रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए। मामले की सुनवाई तीन मई तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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