मैदान छोड़कर भागने वालों में से नहीं हूं : सूर्य प्रताप शाही

शाही ने एक साक्षात्कार में साफ तौर पर कहा कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी में शामिल किया गया, जिसकी वजह से पार्टी को विधानसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा।
शाही ने बड़ी साफगोई से कहा कि कुशवाहा को चुनाव से ठीक पहले पार्टी में शामिल किया गया। हमारे पास ज्यादा समय नहीं बचा था और इसी वजह से उस समय मैंने अपने पद से इस्तीफा देना मुनासिब नहीं समझा। मुझे लगा कि इस्तीफा देने से गलत संदेश जाएगा और लोग कहेंगे कि मैं मैदान छोड़कर भाग गया।
शाही ने हालांकि यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव में परिणाम ज्यादा खराब नहीं आए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में पार्टी के पास कुल 51 सीटें थीं, लेकिन वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले 11 विधायक छोड़कर जा चुके थे। सेनापति होने के नाते पार्टी को इस हालात में छोड़कर जाने से जनता के बीच अच्छा संदेश नहीं जाता।
शाही से यह पूछे जाने पर कि कुशवाहा को पार्टी में शामिल करने का फैसला उनका था या केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर उन्हें इस फैसले को मजबूरन मानना पड़ा, उन्होंने कहा कि कुशवाहा प्रकरण समाप्त हो चुका है और इस विषय में अब कुछ भी कहना सही नहीं है।
भाजपा के प्रदेश में वरिष्ठ नेताओं में शुमार शाही ने हाल ही में देवरिया में अटल संदेश यात्रा का नेतृत्व भी किया और इस दौरान उन्होंने करीब 150 गांवों का दौरा किया। इस यात्रा के बारे में शाही कहते हैं, अटल संदेश यात्रा काफी प्रभावी साबित हुई है। 150 गांवों से होकर यह यात्रा गुजरी है। कई गावों में मैंने खुद रात बिताई है। यात्रा अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से शुरू की गई थी, जिसका अच्छा प्रभाव पड़ा।
शाही से यह पूछे जाने पर कि जिस उद्देश्य को लेकर यात्रा की शुरुआत की गई थी, क्या वह पूरा हुआ, तो उन्होंने कहा, बिलकुल पूरा हुआ। यात्रा के माध्यम से गांव-गांव में लोगों को अटल के सुशासन के बारे में बताया गया और निश्चित तौर पर इसका असर आने वाले समय में देखने को मिलेगा।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में शाही ने कहा कि निश्चित तौर पर वह एक विशाल जनमानस के नेता के रूप में उभरे हैं और यह बात सभी को समझनी चाहिए। जनता केंद्र सरकार की नीतियों से तंग आ चुकी है और वह भाजपा को एक विकल्प के रूप में देख रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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