यूपी में अखिलेश की नाकामी से राहुल को लाभ की उम्मीद

राहुल को लगता है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अपनी नीतियों और केंद्र की जनकल्याणकारी योजनाओं के दम पर इस बार पिछले लोकसभा चुनाव जैसा चमत्कारिक प्रदर्शन कर दोगुनी सीटें जीत सकती है। राहुल ने पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश के सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के दौरान हालिया हार (विधानसभा, स्थानीय निकाय) के बावजूद अगले लोकसभा चुनाव में तस्वीर अलग होने का भरोसा जताया था।
राजनीतिक विश्लेषक एचएन दीक्षित कहते हैं कि यह बात कहीं न कहीं सही है कि पूर्ण बहुमत के साथ उत्तर प्रदेश की सत्ता में आई सपा के राज में जिस तरह अपराध और अराजकता बढ़ी है, उससे आम जनता में अखिलेश सरकार के प्रति निराशा बढ़ी है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को लगता है कि अखिलेश सरकार के प्रति लोगों को निराशा और नाराजगी का फायदा आगामी लोकसभा चुनाव में उठाया जा सकता है। कांग्रेस कानून-व्यवस्था जैसे मुख्य मोर्चे पर विफल सपा सरकार की इस सबसे बड़ी कमजोरी को आगामी चुनाव में मुख्य मुद्दा बनाकर मैदान में उतरेगी।
उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस के एक सांसद ने कहा, बैठक में कांग्रेस उपाध्यक्ष ने हमें समाजवादी पार्टी सरकार के खिलाफ अभी से अक्रामक तेवर अपनाने के निर्देश दिए हैं। सांसद के मुताबिक, राहुल जी ने भरोसा जताया है कि केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार और अखिलेश सरकार के खिलाफ अक्रामक तेवरों के साथ मैदान में उतरने से कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में चालीस से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं।
उल्लेखनीय है कि 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 21 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उसी साल फिरोजबाद लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज कराकर सपा के गढ़ को ध्वस्त कर दिया था। जानकारों का मानना है कि 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर किसानों की ऋण माफी और महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियां गिनाकर सत्ता पाने वाली कांग्रेस को इस बार भी सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, मनरेगा, भोजन का अधिकार, गरीबों को नकदी हस्तांतरण जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के दम पर सफलता पाने की उम्मीद है। (आईएएनएस)












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