सपा और बसपा के रहमोकरम पर पल रही है यूपीए सरकार

mayawati and mulayam
नयी दिल्ली। श्रीलंका में तमिलों के मानवाधिकार के मुद्दे पर डीएमके के यूपीए सरकार का साथ छोड़ दिया है। यूपीए-2 को अपना कार्यकाल पूरा करने के लाले पड़ गए है। सरकार भले ही दावा कर रही है कि उनकी सुरक्षित है, लेकिन डीएमके के साथ छोड़ने पर सरकार के दिग्गजों के माथे पर बल पड़ा हुआ है। देर रात तक प्रधानमंत्री निवास पर देर रात तक सरकार के दिग्गज इस संकट से उबरने के लिए माथा पच्ची करते रहे, लेकिन सरकार के लिए राहत की बात है कि अब तक हर संकट में उसके लिए संकटमोचक रहीं एसपी और बीएसपी फिर सरकार की खेवनहार बनी हुई हैं।

सपा ने भले ही सरकार से समर्थन का भरोसा दियाला हो, लेकिन यूपीए सरकार अब सपा और बसपा के शिंकजें में फंसी हुई है। सपा ने भी इशारों ही इशारों में कांग्रेस को धमकी भी दे दी है। एसपी महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि अभी तो हम सरकार को समर्थन दे रहे हैं, लेकिन कब तक देंगे इसकी कोई गारंटी नहीं है। सपा यूपीए सरकार के इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा द्वारा सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह पर की गई विवादास्पद टिप्पणी के बाद उनसे इस्तीफे की मांग कर रही है तो वहीं बीएसपी की मांग है कि सराकर अल्पसंख्यकों को नौकरी में प्रमोशन के आरक्षण का बिल जल्द से दल्द पास कराए। अब सपा और बसपा के रहमोकरम पर चल रही यूपीए सरकार को इनकी मनमानियों को मानना ही होगा।

यूपीए से डीएमके के हटने के बाद अब सत्ताधारी गठबंधन के पास 232 सांसद ही बच गए हैं। पिछले साल एफडीआई के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के हटने के बाद पहले ही अल्पमत में आ चुकी यूपीए-दो सरकार के सामने अब कार्यकाल पूरा करने की चुनौती बढ़ गई है। अब यूपीए सरकार पूरी तरह से एसपी और बीएसपी के रहमोकरम पर चलने वाली है। बुधवार को एसपी महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि कांग्रेस की गलतियों से कई दल यूपीए को छोड़कर अलग हो रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस को आत्मचिंतन करने की जरूरत है। समर्थन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अभी तो हम सरकार को समर्थन दे रहे हैं, लेकिन आगे का पता नहीं।

राजनीति में चीजें स्थाई रूप से तय नहीं होतीं। दरअसल डीएमके चाहती है कि तमिलों के मुद्दे पर श्रीलंका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की 21 मार्च को होने वाली बैठक में कड़ा प्रस्ताव लाया जाए। डीएमके की मांग थी कि प्रस्ताव में नरसंहार शब्द को जोड़ा जाए। कांग्रेस ने विदेश नीति का हवाला देते हुए ऐसा करने में असमर्थता जता दी। कांग्रेस ने संसद में प्रस्ताव लाने पर जरूर आश्वासन दिया, लेकिन भाषा पर डीएमके राजी नहीं थी। सरकार के इस तरीके से नाराज डीएमके से सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। पार्टी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने देर रात राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मुलाकात कर समर्थन वापसी की चिट्ठी सौंप दी।

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