पोप का ट्वीटर पर पहला संदेश, 'मेरे लिए प्रार्थना करें'
वेटिकन सिटी। पोप फ्रांसिस ने रविवार को ट्विटर पर अपना पहला संदेश लिखा, 'मेरे लिए प्रार्थना करें।' पोप के निजी ट्विटर अकाउंट पर उनका अनुसरण करने वालों की संख्या 30 लाख से ज्यादा है। समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के अनुसार, पोप ने लिखा, "प्रिय मित्रों, मैं आपका दिल से धन्यवाद करता हूं और अपने लिए प्रार्थना करते रहने का आग्रह करता हूं।"
इससे पहले इस ट्विटर अकाउंट का उपयोग पूर्व पोप बेनेडिक्ट सोलहवें किया करते थे। उनके इस्तीफा देने के बाद अकाउंट से सारे संदेश मिटा दिए गए। नये पोप के चुनाव के बाद ट्वीटर पर संदेख लिखा गया, "हमारे नए पोप फ्रांसिस हैं।" ब्यूनस आयर्स के कार्डिनल जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो कैथोलिक ईसाई समुदाय के 266वें पोप चुने गए हैं। आगामी 19 मार्च को पोप फ्रांसिस औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करेंगे।

पोप ने बताई फ्रांसिस नाम चुनने की वजह
नवनिर्वाचित पोप ने अपना नाम फ्रांसिस चुनने की वजह का खुलासा करते हुए उन्होंने उस वजह का बयान किया है, जिसने उन्हें यह नाम चुनने की प्रेरणा दी। पोप के इतिहास में इससे पहले यह नाम किसी ने नहीं रखा है। समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के अनुसार, कैथोलिक समुदाय के 266वें पोप चुने गए ब्यूनोस आयर्स के कार्डिनल, जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो ने पत्रकारों से हुई बातचीत में कहा कि जब सम्मेलन में पोप के पद के लिए उन्हें सर्वाधिक मत मिले, तब ब्राजील के कार्डिनल क्लाऊडियो हम्मेस ने उनसे कहा कि गरीब लोगों को मत भूलना।
पोप ने कहा, "उन्होंने (हम्मेस) मुझे गले लगाया और चूमा। उन्होंने कहा कि गरीब लोगों को मत भूलना और उसी समय मेरे अंतर्मन में नाम उभरा 'फ्रांसिस ऑफ असीसी'।" उन्होंने बताया कि सेंट फ्रांसिस भी गरीब थे और गरीबों के लिए चर्च बनवाना चाहते थे। 19 मार्च (मंगलवार) को दुनिया के 1.2 अरब कैथोलिक ईसाईयों के मार्गदर्शक पोप फ्रांसिस का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा।
पोप के प्रथम संबोधन के वक्त मौजूद रहेंगे बार्थोलोमेव
पश्चिमी और पूर्वी चर्चो के बीच फूट के बाद पहली बार आर्थोडॉक्स चर्च पोप फ्रांसिस के प्रथम संबोधन के समय समारोह में हिस्सा लेंगे। वेटिकन रेडियो ने यह जानकारी रविवार को दी। दुनियाभर के अर्थोडाक्स ईसाई मतावलंबियों के धर्मगुरु माने जाने वाले इस्तांबुल आधारित सार्वभौम पादरी बार्थोलोमेव प्रथम 19 मार्च को सेंट पीटर्स स्क्वायर पर होने वाले फ्रांसिस के पहले आधिकारिक उद्घाटन सभा में हिस्सा लेंगे।
इस कदम को दोनों चर्चो के बीच संबंधों में सुधार के रूप में देखा जा रहा है। पूर्व-पश्चिम मतभेद को महान मतभेद (फूट) के रूप में देखा जाता है। असल में यह चैल्सेडोनिअन ईसाई के पर्वी (यूनानी) और पश्चिमी (लातिन) शाखाओं में मध्ययुगीन बंटवारा है। बाद में इसी को क्रमश: पूर्वी आर्थोडॉक्स चर्च और रोमन कैथोलिक चर्च कहा गया। दोनों मतों में फूट की शुरुआत 1054 ईस्वी में हुई थी।












Click it and Unblock the Notifications