ट्विटर की पिच पर क्लीन बोल्ड हुए शशि थरूर
भारत के 'ट्विटर तेंदुलकर' कहे जाने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर आज ट्विटर की पिच पर शून्य पर क्लीन बोल्ड हो गये। मजेदार बात यह है कि इस बार गेंद भी उन्हीं की थी और बल्ला भी उन्हीं का। पारी भी उन्हीं ने शुरू की थी। ट्विटर पर हुए इस मैच की खिल्ली देश भर में उड़ायी जा रही है। हुआ यूं कि यूपीए सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा रखने वाले शशि थरूर ने ट्विटर पर लिखा, "केरल और गुजरात के विकास की तुलना करने वाले ये आंकड़े.... नरेंद्र मोदी को एक पारी से हराने वाले दिखाई दे रहे हैं।" थरूर को यह नहीं पत था कि जिन आंकड़ों का हवाला उन्होंने दिया है, वो छह साल पुराने हैं। बस फिर क्या है, देश भर के कई पत्रकारों और नेताओं ने उनकी खिल्ली उड़ाने में जरा भी देर नहीं की।
दिल्ली में वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता ने सबसे पहले यह खुलासा किया कि थरूर ने जो आंकड़े दिये हैं वो 2007 के हैं। उन्होंने लिखा, "शशि थरूर पारी से हार तो आपकी हुई है। आपने कितनी छोटी और बच्चों वाली बात की है।" यानी देखा जाये तो थरूर जिस पारी यानी 2007 की बात कर रहे थे, उस समय तो नरेंद्र मोदी मैदान पर उतरे भी नहीं थे, वो तो ड्रेसिंग रूम में तैयार हो रहे थे।

मजेदार बात यह है कि कांग्रेस में सोशल मीडिया के महारथी कहे जाने वाले शशि थरूर खुद भी ट्विटर पर पोस्ट करते वक्त इस पारी के लिये तैयार नहीं थे। उन्हें नहीं पता था कि यह खिलने के बाद ट्विटर पर उनका ऐसे मजाक उड़ाया जायेगा। लोगों को भी नहीं पता था कि कांग्रेस के सोशल मीडिया के मुखिया का यह हाल होने वाला है।
महाराष्ट्र के भाजपा नेता ने लिखा, "लगता है शशि थरूर इटली के मामले पर से देश का ध्यान हटाना चाहते हैं, इसीलिये गुजरात के विकास की तुलना केरल से कर डाली।" उन्होंने आगे लिखा, "'थरूर की गेंद पर मोदी ने तो जबर्दस्त छक्का जड़ा है वो भी मैदान पर बिना आये ही।"
आर जगन्नाथन ने फर्स्ट पोस्ट पर लिखा कि शशि थरूर ने वो नहीं पढ़ा जो एक अच्छे पाठीक जैसे अरविंद पनागारिया, जगदीश भगवती या बिबेक देवरॉय ने पढ़ा (ये लोग राजीव गांधी एसोसिएशन से पहले जुड़े रहे हैं) कि लेख ने गुजरात के विकास के बारे में क्या कहा है। सच पूछिए तो शशि थरूर को सोशल मीडिया में ऐसा लिखने से पहले नरेंद्र मोदी के उस अडिग बर्ताव को याद रखना चाहिये, जो जापान में मोदी का था, जब मारूति के बारे में उनसे सवाल किया गया था। उन्होंने एक बार भी यह अहसास नहीं होने दिया था कि हरियाणा कांग्रेस शासित राज्य है।
यह लेख किशोर त्रिवेदी द्वारा अंग्रेजी में लिखे गये लेख का सार है।












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