गे-लेस्बियन को नहीं मिल पाएगा भारत में किराए का कोख

अब इस वीजा नियमों का पालन कर के ही विदेशी नागरिक भारत में सेरोगेसी से बच्चा ले सकते है। नए नियमों के तहत अविवाहित, समलैंगिकों और लैस्बियन जोड़ों के लिए देश में आकर सेरोगेसी के जरिये बच्चा हासिल करना संभव नहीं होगा। गृह राज्यमंत्री मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने कहा है कि मंत्रालय ने सेरोगेसी के लिए भारत आने वालों के लिए मेडिकल वीजा लेना अनिवार्य कर दिया है। लेकिन विदेश से भारत आने वाले जोड़ों को सेरोगेसी के लिए चिकित्सा वीजा हासिल करने के लिए भी
कुछ नियमों का पालन करना होगा। सेरोगेसी कानून को और सख्त बनाने के लिए और इससे जुड़े अपराध को रोकने के लिए विदेश से आने वाले जोड़ों को अपने वीजा के साथ-साथ इस बात का भी प्रमाण देना होगा की वो कानूनी तौर पर विवाहित है और उनके विवाहित जीवन के दो साल पूरे हो गए हों।
भारत सरकार के इस कानून के बाद भारत में सेरोगेसी के लिए केवल उन्हीं जोड़ों को मान्याता दी जाएगी जो स्त्री-पुरुष के तौर पर रहते है। मतलब यह कि इस कानून के बाद भारत में समलैंगिक जोड़ों को सेरोगेसी के लिए वीजा नहीं दिया जाएगा। साथ ही सिंगल पेरेन्ट्स को भी भारत में सेरोगेसी के लिए मेडिकल वीजा वीजा नहीं दिया जाएगा।
गौरतलब है कि अब तक भारत में सेरोगेसी के लिए कोई कानून नहीं है। जिसके कारण देश में धड़ल्ले से सेरोगेसी का काला कारोबार बढ़ता जा रहा है। भारी तादात में विदेशी समलैंगिक जोड़े किराए की कोख के लिए भारत आ रहे हैं। दिल्ली, गुजरात, मुंबई समेत देश के कई शहर ऐसे जोड़ों के हब बन गए हैं। कई बार सेरोगेसी की प्रक्रिया शुरू होने के बाद कई जोड़ों में बच्चे को लेने के लिए नहीं आते हैं। कई बार तो इस की वजह से सोरोगेसी से पैदा हुए बच्चों को राष्ट्र की नागरिकता मिलने में दिक्कत आ जाती है। ऐसे में इन सब दिक्कतों से निपटने के लिए सरकार ने सेरोगेसी के नियमों को सख्त करने का मन बना लिया है।












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