राहुल गांधी के सपने का बुंदेलखंड बेहाल, दलाल मालामाल

बुंदेलखंड की गिनती देश के पिछड़े इलाकों में होती है, जिसके विकास के लिए राहुल गांधी की पहल पर 7,200 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज का प्रावधान किया गया। इनमें से 3,400 रुपये मध्य प्रदेश सरकार को देने हैं। यह बात अलग है कि तीन वर्ष से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी इस क्षेत्र को अपने हिस्से की पूरी राशि नहीं मिल सकी है।
मध्य प्रदेश के छह जिलों सागर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर व दतिया में विकास कार्य के लिए विशेष पैकेज तो स्वीकृत किए जा रहे हैं, लेकिन किसी तरह का विकास कार्य नहीं किया जा रहा है।
पन्ना जिले में एक सामाजिक संस्था द्वारा सूचना के अधिकार के तहत हासिल किए गए दस्तावेजों में वन विभाग द्वारा दुपहिया वाहनों से टनों मुरुम व पत्थर की ढुलाई में करोड़ों रुपये के घपले की आशंका जताई जा रही है। नेशनल रेन फेड एरिया अथॉरिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. जे. एस. सामरा भी बुंदेलखंड पैकेज के तहत चल रहे कार्यो में गड़बड़ी का जिक्र कर चुके हैं।
राज्य के पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने बुंदेलखंड पैकेज के तहत नलकूप के लिए खरीदे गए पाइप में गड़बड़ी का खुलासा करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भी लिखा था। उन्होंने इस पत्र में साफ कहा था कि बुंदेलखंड पैकेज की राशि से घटिया पाइप खरीदे जा रहे हैं।
नया मामला निर्माण कार्य में उपयोग में लाए गए लोहे के भुगतान का है। राज्य के जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया ने स्वीकार किया है कि राजघाट नहर वितरण संभाग खनियाधाना जिला शिवपुरी के कार्यपालन यंत्री ने ठेकेदार को निर्माण में उपयोग में लाए गए लोहे का 52 हजार रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान किया है।
वास्तव में, भुगतान 5,966 रुपये ही किए जाने थे, लेकिन उसकी जगह 59 लाख 65 हजार 617 रुपये का भुगतान किया गया है। इस तरह तय भुगतान से राशि 59 लाख 59 हजार 551 रुपये अधिक है। अतिरिक्त भुगतान का खुलासा होने पर संबंधित ठेकेदार से अब तक 22 लाख 59 हजार 984 रुपये की वसूली की जा चुकी है।
बुंदेलखंड आपदा मंच के संयोजक संजय सिंह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश की तुलना में मध्य प्रदेश में कुछ काम हुआ है, लेकिन यहां भी बुंदेलखंड पैकेज में कम भ्रष्टाचार नहीं हो रहे। बुंदेलखंड पैकेज से अब तक मध्य प्रदेश के इन छह जिलों में सिंचाई परियोजनाओं सहित अन्य योजनाओं के लिए स्वीकृत राशि से इलाके के हालात चाहे न बदले हों, लेकिन कई अधिकारी व ठेकेदार जरूर मालामाल हो गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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