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आम बजट 2013 समीक्षा: चिदंबरम की मुस्कान मजबूरी है

नई दिल्ली। आज देश के वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने संसद में देश का 82वां आम बजट पेश किया है। जैसा कि अनुमान था कि चिदंबरम के बजट पर आगामी लोकसभा चुनाव का असर दिखेगा तो उस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। वाकई में जो बजट आज वित्तमंत्री ने पेश किया है वो राजनैतिक दुविधाओं से ग्रस्त था।

फौरी तौर पर देखा जाये तो आज के बजट में चिदंबरम ने यह बताने और जताने की कोशिश की उसे मिडिल क्लास का पूरी तरह से ख्याल है। इसलिए उन चीजों को जो सीधे तौर पर आम जनता की जेब पर असर डालती है, के दामों को नहीं बढ़ाया है। बल्कि उन चीजों को महंगा किया है जिनका प्रयोग करने वाले खर्चे करने से पहले नहीं सोचते हैं।

आज चिदंबरम ने महिलाओं और नवयुवकों को खुश करने की कोशिश की है। उन्होंने अपने पिटारों से साबित करने की कोशिश की है कि यूपीए 2 केवल आम जनता के बारे में सोचती है।

भले ही उसने रोजमर्रा की चीजों पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई है जिससे दैनिक प्रयोग की चीजें महंगी तो हुई है लेकिन उन्हें दूसरे रूप में सस्ता दिखाने की कोशिश सरकार की ओर से की गयी है। जो कि एक बड़ी बात है।

तो वहीं देश की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए चिदंबरम ने कहा कि जो लोग ज्यादा पैसे कमाते हैं, वो ज्यादा टैक्स भरे जिसे सुनने के बाद शायद धनी वर्ग को कुछ ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उनके पास खर्चे से ज्यादा आमदनी है उन्हे टैक्स सौ रूपये देना पड़े या एक हजार उनकी सेहत पर असर नहीं होगा। और गौर करने वाली बात यह है जिन्हे धनी वर्ग कहा जा रहा है उनकी संख्या हमारे देश में है ही कितनी?

कुल मिलाकर पी चिदंबरम जो कि लीक से हटकर बजट पेश करने वाले जाने जाते थे ने इस बार कोई करिश्मा तो नहीं दिखाया है। हां लंबे अरसे के बाद उन्होंने अपनी मुस्कान से देश की जनता को खुश करने की कोशिश जरूर की है ताकी वो और उनकी सरकार आने वाले दिनों में भरपूर रूप से खिलखिला सके।

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