जल्‍द ही बढ़ेंगी चीनी की कीमतें

नई दिल्‍ली। पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोत्‍तरी के बाद अब चीनी की कीमतें भी जल्‍द ही बढेंगी। सरकार ने चीनी को डी कंट्रोल करने का फैसला किया है जिससे अब चीनी की कंपनियां ही इसका मूल्‍य तय करेंगी। सरकार ने एक्‍साइज ड्यूटी को भी 98 पैसे से बढ़ाकर 2.50 रूपये कर दिया है। सरकार के इस फैसले पर प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्‍तमंत्रालय ने भी अपनी सहमति दे दी है।

दरअसल अभी तक चीनी कंपनियां अपने उत्‍पादन का दस फीसदी कम दरों पर सरकार को देती थी। जिसे सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्‍यम से गरीबों को मुहैया करवाती रही है। लेकिन अब चीनी को डी कंट्रोल कर देने से सरकार को भी बाजार की कीमतों के मुत‍ाबिक ही कंपनियों से चीनी खरीदना होगा और उसे सस्‍ते दामों पर ही गरीबों को उपलब्‍ध करावाना होगा। ऐसे में सरकार पर अतिरिक्‍त भार पड़ेगा जिसे खत्‍म करने के लिए एक्‍साईज ड्यूटी में इतनी अधिक वृद्धि की गई है।

Sharad Pawar

खाद्य मंत्रालय ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर एक्‍साइज ड्यूटी न बढाई गयी तो सरकार पर सब्सिडी का भार पड़ेगा और सरकार इस भार को उठाने में सक्षम नहीं है। केंद्र को प्रतिवर्ष सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए 27 लाख टन चीनी की आवश्‍यकता होती है। कृषि मंत्री शरद पवार ने इस पर कहा है कि अभी तक सरकार 17 रूपये प्रति किलो चीनी खरीदती थी और इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 13.50 रूपये प्रति किलो के हिसाब से बेंचती थी। अब सरकार बाजार मूल्‍य पर ही चीनी खरीदेगी और सस्‍ते दामों पर गरीबों को उपलब्‍ध करवायेगी। जिससे सरकार पर वित्‍तीय बोझ पड़ेगा। इस वित्‍तीय भार को कम करने के लिए ही एक्‍साइज ड्यूटी को बढ़ाया गया है।

अब देखने वाली बात यह है कि सरकार के इस फैसले पर विपक्ष किस तरह प्रतिक्रिया करता है और लोकसभा चुनाव के मद्देनजर इस फैसले का किस प्रकार लाभ उठाने की कोशिश करता है?

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