2015 तक आधे भारतीयों के पास होंगे डेबिट कार्ड

अध्ययन में कहा गया है कि पिछले वर्ष के अंत तक लगभग 31.44 करोड़ बैंक उपभोक्ताओं को डेबिट कार्ड जारी कर दिए गए थे। यह संख्या 18 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी है और इस दर में यदि वृद्धि नहीं हुई तो भी इस दर के कम से कम बने रहने की पूरी सम्भावना है। अध्ययन में कहा गया है, "इसके चलते बैंक डेबिट कार्डो की संख्या अगले तीन वित्तीय वर्षो में 54 करोड़ के ऊपर हो जाएगी।"
अध्ययन में कहा गया है कि दिसम्बर 2012 तक बाजार में क्रेडिट कार्डो की संख्या मात्र 1.88 करोड़ थी। जिसकी वार्षिक वृद्धि दर बमुश्किल छह से सात प्रतिशत रही। उपभोक्ता अत्यधिक ब्याज दर और भुगतान में मामूली विलम्ब पर भी लगने वाले जुर्माने की दर के कारण क्रेडिट कार्ड लेने से बचते हैं।
एसोचैम के अध्यक्ष राजकुमार धूत ने कहा, "प्लास्टिक मनी के तौर पर पहचाने जाने वाले क्रेडिट कार्डो, अर्थात कर्ज पर जीने की संस्कृति भारत में जोर नहीं पकड़ रही है। इसकी प्रमुख वजह में कार्ड के उपयोग पर लगने वाला अज्ञात प्रभार लोगों एक प्रकार से धोखा प्रतीत होता है।"
इसके अलावा क्रेडिट कार्ड के जरिए लेनदेन में धोखाधड़ी की खबरें यदा-कदा आती ही रहती हैं। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों की वजह से भी क्रेडिट कार्डो से लोगों का भरोसा उठता जा रहा है। इसके विपरीत डेबिट कार्ड का उपयोग मूल रूप से धनराशि निकालने के लिए की जाती है न खरीदारी आदि के लिए।
दिसंबर 2012 में क्रेडिट कार्ड के जरिए 124 करोड़ रुपये निकाले गए, जबकि इसकी तुलना में डेबिट कार्ड से 1,46,125 करोड़ रुपये निकाले गए। एसोचैम के अध्ययन में कहा गया है कि डेबिट कार्ड एक तरह से एटीएम के जरिए बैंक के कैशियर की भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही इसका फायदा यह भी है कि एटीएम के बढ़ते उपयोग से बैंकों में अपेक्षाकृत भीड़भाड़ कम होती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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