राजनाथ सिंह ने की आडवाणी के रिकॉर्ड की बराबरी

नई दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। भारतीय जनता पार्टी में राजनाथ सिंह का कद आज कई गुना बढ़ गया, जब उन्‍हें दूसरी बार पार्टी का अध्‍यक्ष चुना गया। देखा जाये तो इस मामले में आडवाणी ने लाल कृष्‍ण आडवाणी के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। आडवाणी के बाद राजनाथ एक मात्र नेता हैं, जिन्‍हें एक से अधिक बार भाजपा का अध्‍यक्ष चुना गया है। पढ़ें- राजनाथ सिंह की ताकत।

वैसे राजनाथ सिंह को दोबारा यह पद मिलने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि वो बेहद साफ-सुथरी छवि वाले नेता हैं। उनके खिलाफ ना तो किसी तरह के भ्रष्‍टाचार का आरोप लगा है और ना ही उनकी राजनीति करियर में कोई दाग है। वो हमेशा से पूरी तरह विवादों से मुक्‍त रहे हैं। वो अपने हर फैसले के पहले आरएसएस से सलाह जरूर लेते हैं।

राजनाथ सिंह खुद को भाजपा की गुटबाजी से हमेशा अलग रखा। यही कारण है कि सभी नेताओं से उनके अच्‍छे संबंध हैं। राजनाथ सिंह भाषण देने की कला में पारंगत है जो कि यूपी चुनाव में काम आ सकता है। उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री रह चुके हैं, लिहाजा वे यूपी की उठापटक से अच्‍छी तरह वाकिफ हैं और उनके ये स्किल्‍स 2014 में जरूर काम आयेंगे, क्‍योंकि दिल्‍ली में संसद का रास्‍ता यूपी होते हुए ही जाता है।

देश भर से उन्‍हें शुभकामनाएं मिल रही हैं। चलिये इस मौके पर हम एक नज़र उनकी तरफ ले जाते हैं, जो भाजपा के अध्‍यक्ष रह चुके हैं-

अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी

भारतीय जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी में परिवर्तित होने के बाद सबसे पहले अध्‍यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी बने। उन्‍होंने 1980 में पार्टी की कमान संभाली और छह साल के भीतर पार्टी को नये मुकाम पर पहुंचाया। आगे चलकर भाजपा केंद्र में सत्‍ता में आयी और अटल जी तीन बार देश के प्रधानमंत्री भी बने। उनका प्रभाव जम्‍मू-कश्‍मीर से लेकर तमिलनाडु तक आज भी देखा जा सकता है।

लाल कृष्‍ण आडवाणी

लाल कृष्‍ण आडवाणी

आडवाणी भाजपा के अध्‍यक्ष तीन बार बने। 1986-1991, 1993-1998 और 2004-2006। इन तीनों कार्यकाल में आडवाणी ने पार्टी को कई उपलब्धियां दिलायीं। आडवाणी के कार्यकाल में पार्टी ने कई राज्‍यों की विधानसभाओं पर कांग्रेस से सत्‍ता छीनी और तेजी से आगे बढ़ी।

मुरली मनोहर जोशी

मुरली मनोहर जोशी

मुरली मनोहर जोशी भाजपा के अध्‍यक्ष 1991 से 1993 तक रहे। इन्‍हीं के कार्यकाल में भाजपा ने अयोध्‍या का मुद्दा छेड़ा और देश भर में कार सेवक तैयार किये गये। हालांकि यह काम आडवाणी के कार्यकाल से ही शुरू हो चुका था, लेकिन बाबरी कांड के दौरान जब कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद तोड़ी थी, तब जोशी ही भाजपा के सुप्रीमो थे। कारसेवकों के साथ वो भी आगे-आगे चल रहे थे।

कुशाभाऊ ठाकरे

कुशाभाऊ ठाकरे

मध्‍य प्रदेश के कद्दावर नेता कुशाभाऊ ठाकरे भाजपा के अध्‍यक्ष 1998 से 2000 के बीच रहे। इनके कार्यकाल में भाजपा ने बहुत ज्‍यादा उपलब्धियां हांसिल नहीं कीं। हालांकि बतौर नेता उन्‍होंने कई उपलब्धियां हासिल कीं।

बंगारू लक्ष्‍मण

बंगारू लक्ष्‍मण

भारतीय जनता पार्टी में अब तक के सबसे बदनाम अध्‍यक्षों में से अगर कोई है तो वो बंगारू लक्ष्‍मण हैं। इन्‍होंने 2000 से 2001 के बीच पार्टी की कमान संभाली लेकिन इनका नाम तहलका ने एक भ्रष्‍टाचार के मामले में उजागर किया, जिसके बाद उन्‍हें पार्टी अध्‍यक्ष का पद छोड़ना पड़ा।

जना कृष्‍णमूर्ति

जना कृष्‍णमूर्ति

पार्टी में 2001 से 2002 के बीच पार्टी के अध्‍यक्ष के तौर पर रहे। उस समय पार्टी की स्थिति काफी नाजुक हो गई थी। भ्रष्‍टाचार के आरोपों से घिरी भाजपा को उबारने की कोशिश की, लेकिन उन्‍हें पर्याप्‍त समय नहीं मिला।

वैंकेया नायडू

वैंकेया नायडू

साल 2002 से 2004 तक भाजपा के अध्‍यक्ष रहे वैंकेया नायडू के कार्यकाल में भी पार्टी लोकसभा चुनाव हारी। यूपीए ने दिल्‍ली पर कब्‍जा किया और फिर केंद्र में भाजपा को कभी सत्‍ता नहीं मिली। हालांकि चुनाव हारने में लाल कृष्‍ण आडवाणी को भी जिम्‍मेदार ठहराया गया। क्‍योंकि 2004 में उन्‍हें अध्‍यक्ष चुना गया था।

राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह

2004 में लोकसभा चुनाव में मिली करारी हर के बाद भाजपा बिखरने सी लगी, तब पार्टी की कमान राजनाथ सिंह को सौंपी गई। राजनाथ सिंह के सभी नेताओं से अच्‍दे संबंध होने की वजह से एक बार फिर पार्टी मजबूत होनी शुरू हो गई। 2009 तक वो पार्टी के अध्‍यक्ष रहे और अब एक बार फिर आज उन्‍हें अध्‍यक्ष चुना गया है।

नितिन गडकरी

नितिन गडकरी

महाराष्‍ट्र के बड़े नेताओं में से एक नितिन गडकरी के नेतृत्‍व में भारतीय जनता पार्टी काफी अच्‍छा प्रदर्शन कर रही थी। कई राज्‍यों में सत्‍ता जमाने के बाद जब केंद्र का नंबर आया तो उन पर भ्रष्‍टाचार के आरोप लग गये, जिसके चलते गडकरी ने इस्‍तीफा दे दिया। हालांकि महज दो दिन पहले तक गडकरी का दोबारा अध्‍यक्ष बनना लगभग तय हो चुका था।

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