खाप का तालिबानी फरमान, बंद हो आर्य समाज मंदिर

रविवार को रोहतक में खाप पंचायत ने सभी जातियों की मीटिंग बुलाई थी, जिस के बाद उन्होंने ये फरमान जारी किया था। दरअसल कुछ दिनों पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों को ऑनर किलिंग और समगोत्री विवाह को लेकर कड़ी फटकार लगाई थी, जिसके बाद से खाप पंचायत अपनी छवि सुधारने में लगा हुआ है। इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों से उनके भूमिका के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है और कहा है कि खाप पंचायत अपने लिए एक गाइडलाइन तैयार करें। जिसके बाद खाप पंचायतों ने समाज में अपनी भूमिका और अपने दायित्वों को लेकर सभी जातियों को लेकर चलने की रणनीति तैयार कर ली है।
बैठक के दौरान पंचों ने दलील दी कि आर्य समाज मंदिरों के लचीले नियम समाज में प्रेम विवाद और समगोत्री विवाद को बढ़ावा देते है। इन मंदिरों में प्रेमी जोड़ों की शादी बिना मां-बाप की रजामंदी के ही हो जाती है। खापों के मुताबिक इस तरह की शादियों को बढ़ावा मिलने से उनके समाजिक नियम उनके रीति-रिवाजों को कमजोर होते है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि वो सरकार कि उन कानूनों को नहीं मानेगे जिससे की उनके सामाजिक नियमों और रीति-रिवाजों पर असर पड़ता हो। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वो किसी भी कीमत पर सरकार के बनाए कानू उनकी सामाजिक व्यवस्था को तोड़ नहीं सकते।
इस बावत आर्य समाज के लोगों से पूछा गया तो उन्होंने भी इस बात पर मुहर लगाई कि उन्हें खाप पंचायतों से निर्देश दिए गए है कि हरियाणा के अन्दर जितने भी आर्यसमाज के मंदिर है वहां प्रेम-विवाह मां-बाप की अनुमति के वगैर नहीं कराए जाए। उन्होंने कहा कि आर्यसमाज मंदिर अन्तर-जातिय विवाह को तो प्रमोट करता है लेकिन समगोत्री विवाह के पक्षधर वो भी नहीं है।












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