विरोध के बावजूद पार्टी अध्यक्ष तो गडकरी ही बनेंगे!
लेकिन संघ के दवाब में पार्टी ऐसा करने को मजबूर है। जेठमलानी से लेकर आ़डवाणी तक लोग गडकरी के खिलाफ खुलकर बोल चुके हैं। इसके बावजूद ग़डकरी को छोड़कर और कोई नहीं नेता नहीं हैं जो अध्यक्ष पद की दावेदारी पेश करते हुए नामांकन करे।
खबर है कि आरएसएस हर हालत में ही नितिन गडकरी को ही पार्टी अध्यक्ष के रूप में देखना चाहता है इसलिए उसने लाल कृष्ण आडवाणी से फोन पर बात भी की है। क्योंकि आडवाणी ने खुले आम कहा है कि नितिन गडकरी को दोबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष ना बनाया जाये। खबर है कि आडवाणी का कहना है कि गडकरी की जगह प्रेसिडेंट पद की सीट पर सुषमा स्वराज या उनको बैठा दिया जाये। लेकिन सुषमा की ओर से इंकार कर दिया गया है क्योंकि वो नहीं चाहतीं कि बिना आरएसएस की रजामंदी से वो पार्टी अध्यक्ष बनें।
मालूम हो कि गडकरी के खिलाफ लोग इसलिए हो गये हैं क्योंकि उनके ऊपर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं इसलिए भाजपा का एक बहुत बड़ा तबका इसलिए उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी वापस नहीं देना चाहता क्योंकि उसे लगता है कि गडकरी पर लगे आरोपों के चलते उसे आने वाले लोकसभा चुनाव में घाटा उठाना पड़ेगा। लेकिन आरएसएस के कड़े रूख के चलते गडकरी को एक बार फिर से अध्यक्ष पद मिल सकता है।













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