लोकायुक्त की नियुक्ति से गुजरात का भ्रष्टाचार सामने आयेगा

वहीं सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा है कि कोर्ट का फैसला हर किसी को मानना होगा क्योंकि कानून से ऊपर कोई नहीं है। इस पर कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा है कि गुजरात सरकार की हमेशा से ही यही कोशिश रही है कि राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति न हो।
कांग्रेस के एक और नेता बी हरिप्रसाद ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है और कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से यह साबित हो गया है कि गुजरात में अभी तक तानाशही का रवैया था। हम सभी को सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं के बयानों का जवाब देते हुए भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि जो भी लोग गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह बताते हैं, वह अभी तक हार से उबर नहीं पाये हैं और इस हार को अभी पचा नहीं पा रहे हैं। मोदी ने वहां अपने विकास कार्यों की बदौलत सत्ता में वापसी की है।
यह ध्यान देने योग्य है कि गुजरात में लोकायुक्त की नियुक्ति का मोदी सरकार ने विरोध किया है। लोकायुक्त के रूप में गुजरात में नियुक्त होने जा रहे जस्टिस आर ए मेहता ने इस संबंध में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने कहा है कि गुजरात में हुए पांच हजार करोड़ रूपये के घोटाले को दबाने के लिए लोकायुक्त की नियुक्ति को रोका जा रहा था लेकिन अब सच को सामने आने से नहीं रोका जा सकेगा।












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