सोची समझी राजनीतिक चाल है कसाब को फांसी?

Manmohan, Sonia
नई दिल्‍ली। मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब को फांसी यूपीए सरकार की सोची समझी राजनीतिक चाल है। जी हां कसाब पिछले चार साल से मुंबई के अर्थर रोड जेल में बंद था। सुप्रीम कोर्ट उसे पहले ही फांसी की सजा सुना चुकी थी और प्रणब मुखर्जी को राष्‍ट्रपति बने भी लंबा समय हो गया है। आखिर कसाब को फांसी 21 नवंबर को ही क्‍यों दी गई? इस सवाल के जवाब हम यहां खोजेंगे।

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कल से संसद में शुरू हो रहा शीतकालीन सत्र, जिसमें सरकार देश के सामने कसाब के नाम पर दम भरना चाहती है। इसमें कोई शक नहीं कि तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी अन्‍य दलों के साथ मिलकर यूपीए के खिलाफ एफडीआई को लेकर अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने वाली हैं। ऐसे में सरकार ने अपना विश्‍वास हासिल करने के लिये कसाब को संसद सत्र के ठीक पहले यह काम किया। वैसे सरकार गरम तवे पर हथौड़ा मारने में पहले से ही माहिर है।

एक दूसरा कारण यह भी है, कि गुजरात में चुनावी बयार बह रही है। नरेंद्र मोदी के समर्थक हर तरफ यूपीए सरकार की बखिया उधेड़ने में जुटे हुए हैं। ऐसे में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपनी वाह-वाही जरूर करेगी और कसाब को लेकर जो भी वोटर वाह-वाही में आ जायेगा, उसका वोट समझो पक्‍का।

इन दो बातों को ध्‍यान में रखते हुए यूपीए ने यह चाल चली। खास बात यह है कि ऐसे महत्‍वपूर्ण समय में प्रधानमंत्री भी देश से बाहर हैं।

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