टीचर की पिटाई से हुआ कैंसर अब मौत

Priya
जयपुर। दो साल पहले होमवर्क नहीं करने पर जयपुर के एक स्‍कूल में टीचर ने सात साल की बच्‍ची को इतने थप्‍पड़ लगाये कि बच्‍ची की एक आंख की रौशनी चली गई। डेढ़ साल की जद्दोजहद के बाद कोर्ट के आदेश पर बच्‍ची को न्‍याय तो मिल गया, लेकिन जिंदगी नहीं। शुक्रवार को ब्‍लड क्‍लॉटिंग के कारण उसकी मौत हो गई।

बच्‍ची की मौत से देश के सकूल सबक लेंगे या नहीं, यह तो वक्‍त बतायेगा, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि आज भी तमाम स्‍कूलों में टीचर अपनी निजी भड़ास बच्‍चों पर ही निकालते हैं। इस घटना को पूरी तरह जानने के लिये हम आपको ले चलते हैं 2010 में, जबकि जयपुर के टैगोर स्‍कूल में 7 साल की बच्‍ची को उसकी टीचर ने होमवर्क नहीं करने पर जमकर पीटा।

पूरे क्‍लास के सामने बच्‍ची की इतनी पिटाई की कि बच्‍ची की एक आंख सूज गई। बच्‍ची घर आयी तो देर शाम आंख से खून आने लगा। मां-बाप के होश उड़ गये। उसे तुरंत अस्‍पताल ले गये, जहां करीब पांच दिन इलाज चला लेकिन डॉक्‍टर बची की एक आंख की रौशनी वापस नहीं ला सके। इस घटना का शहर भर में जमकर विरोध हुआ। मामला कोर्ट तक पहुंचा, जहां कोर्ट ने स्‍कूल के खिलाफ फैसला सुनाया और बच्‍ची के परिवार को 15 लाख रुपए का मुआवजा दिया।

डॉक्‍टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद मौत ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। धीरे-धीरे बच्‍ची की आंख के अंदर कैंसर बन गया। पिछले डेढ़ साल तक मौत हर रोज घर पर दस्‍तक देती और चली जाती। शुक्रवार को आखिरकार मौत को सफलता मिल ही गई, जब अचानक बच्‍ची की उसी आंख में ब्‍लड क्‍लॉटिंग हो गई। परिजन उसे फिर अस्‍पताल ले गये, लेकिन इस बार डॉक्‍टर उसे नहीं बचा सके।

इस खबर के माध्‍यम से हम देश के सभी शिक्षकों से अपील करना चाहते हैं कि बच्‍चों को अपनी संतान की तरह समझें, उन पर इस प्रकार का जुल्‍म कभी न करें।

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