यूथ फेस्टिवल में दिखा विभिन्न संस्कृतियों का अदभुत संगम
सिरसा। विरासत, कला, परम्परा, सभ्यता, सुर, साज और गीतों की मधुर धुन। जिसने भी सुना, जिसने भी देखा बस देखता ही रह गया! गत सोमवार को यह आगाज था जेसीडी विद्यापीठ के प्रांगण में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के तत्वावधान में आयोजित किये जा रहे युवा महोत्सव का। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस युवा महोत्सव में 47 महाविद्यालयों के करीब 600 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इस कार्यक्रम का शुभारंभ बतौर मुख्यातिथि सिरसा की पुलिस अधीक्षक डॉ. राजश्री सिंह एवं पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील पी.के. संधीर द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यों के डीन प्रो. सुल्तान सिंह व डी.एन. कॉलेज हिसार के पूर्व प्राचार्य डॉ. सुभाष शर्मा थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता जेसीडी विद्यापीठ की प्रबन्ध निदेशक डॉ. शमीम शर्मा ने की। सभी अतिथियों द्वारा युवा महोत्सव का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया।
हिरसा यूथ फेस्टिवल में दिखा विभिन्न संस्कृतियों संगम, तस्वीरें

यूथ फेस्टिवल में दिखा विभिन्न संस्कृतियों का अदभुत संगम
विरासत, कला, परम्परा, सभ्यता, सुर, साज और गीतों की मधुर धुन। जिसने भी सुना, जिसने भी देखा बस देखता ही रह गया! गत सोमवार को यह आगाज था जेसीडी विद्यापीठ के प्रांगण में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के तत्वावधान में आयोजित किये जा रहे युवा महोत्सव का। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस युवा महोत्सव में 47 महाविद्यालयों के करीब 600 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इस कार्यक्रम का शुभारंभ बतौर मुख्यातिथि सिरसा की पुलिस अधीक्षक डॉ. राजश्री सिंह एवं पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील पी.के. संधीर द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यों के डीन प्रो. सुल्तान सिंह व डी.एन. कॉलेज हिसार के पूर्व प्राचार्य डॉ. सुभाष शर्मा थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता जेसीडी विद्यापीठ की प्रबन्ध निदेशक डॉ. शमीम शर्मा ने की। सभी अतिथियों द्वारा युवा महोत्सव का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया।

मुख्यधारा से जोड़ता है युवा महोत्सव -डॉ. शमीम
इस अवसर पर प्रबन्ध निदेशक डा. शमीम शर्मा ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि विश्वविद्यालय द्वारा इस युवा महोत्सव के आयोजन का कार्यभार हमें सौंपा गया है इसे हम बखूबी निभाएंगे। उन्होंने प्रतिभागियों को आश्वासन देते हुए कहा कि प्रत्येक प्रतिस्पर्धा में निष्पक्षता एवं पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग देश के निर्माण और विकास में अपना अह्म योगदान प्रदान करते हैं, इसलिए युवा वर्ग को मुख्य धारा से जोडऩे के लिए युवा महोत्सव का आयोजन ज़रूरी बन पड़ता है। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील पी.के. संधीर ने छात्रों के साथ अपने कॉलेज के पलों की याद को सांझा करते हुए कहा कि युवा अवस्था अपने आप में एक उत्सव की तरह होती है तथा यह अनमोल क्षण जीवन में फिर कभी नहीं आएंगे इसीलिए जो काम करें पूरे मन एवं लगन के साथ तथा भरपूर आनंद के साथ करना चाहिए।

'लागी पड़ी फुहार रिमझिम सावन आया'
इस दौरान सबसे अधिक आकर्षित करने वाला 100 विद्यार्थियों के दल द्वारा अतिथियों के स्वागत के लिए पंजाबी, हरियाणवी, गुजराती एवं राजस्थानी संस्कृति को प्रदर्शित करने वाली स्वागत कतार रहा, जोकि अपनी-अपनी संस्कृति की छटा बिखेर रही थी। महोत्सव की शुरूआत में तरन्नुम ने कबीर के शब्द को अपनी सुरीली आवाज में सुनाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। योगिमा व गु्रप ने 'लागी पड़ी फुहार रिमझिम सावन आया' लोकगीत सुनाकर हरियाणवी संस्कृति से परिचित करवाया।

सराही गई नारी सशक्तिकरण व भू्रण हत्या की कोरियोग्राफी
युवा महोत्सव में पहले दिन कोरियोग्राफी, लोकगीत, शास्त्रीय संगीत व नृत्य, गज़ल, मूक अभिनय व संस्कृत नाटक प्रमुख प्रतिस्पर्धाओं का मंचन तीन निर्धारित मंचों पर किया गया। जिसमें प्रथम मंच पर विभिन्न महाविद्यालयों द्वारा प्रस्तुत की गई कोरियोग्राफी ने सभी दर्शकों का मन मोह लिया। टीम नं. 8 ने नारी सशक्तिकरण व भू्रण हत्या विषय पर कोरियोग्राफी प्रस्तुत करके दर्शकों को सोचने पर विवश कर दिया। टीम नं. 14 ने गरीबी व भू्रण हत्या का मार्मीक मंचन किया। इसके अतिरिक्त अन्य टीमों द्वारा देशभक्ति व श्रीकृष्ण लीलाओं से सम्बन्धित कोरियाग्राफी प्रस्तुत की। लोकगीत प्रतिस्पर्धा में छात्रों ने हिन्दी, हरियाणवी व पंजाबी भाषा में लोकगीत प्रस्तुत करके दर्शकों को अपनी संस्कृति से रूबरू कराया व दर्शकों का मन मोह लिया।

'केसरियां बालम आयो रे-पधारो म्हारे देस' में दिखा राजस्थानी कल्चर
इसमें टीम नं. 43 द्वारा प्रस्तुत लोकगीत 'ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे' व टीम नं. 1 द्वारा प्रस्तुत राजस्थानी लोकगीत 'केसरियां बालम आयो रे-पधारो म्हारे देस' प्रमुख रहे। उधर सायंकालीन सत्र में दूसरे मंच पर नाटक, शास्त्रीय नृत्य, हरियाणवीं नृत्य व संस्कृत नाटक की प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन किया गया। शास्त्रीय नृत्य की प्रतिस्पर्धा में कथक की धूम रही। नाटक प्रतिस्पर्धा में कुल 9 कॉलेजों ने धरती पर होने वाले अत्याचारों को रोकने, मताधिकार का प्रयोग करने तथा लड़के व लड़कियों को गिरते लिंगानुपाल पर नाटक प्रस्तुत किए। संस्कृत नाटक प्रतिस्पर्धा में सती स्वांगम शीर्षक पर व देववध नाटक प्रस्तुत किया गया।

शास्त्रीय मुखर व वाद्य प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन
तृतीय मंच पर आयोजित कार्यक्रम में शास्त्रीय मुखर व वाद्य प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन किया गया। शास्त्रीय मुखर प्रतियोगिता में टीम नं. 8 ने राग मधुवन और टीम नं. 34 की प्रतिभागी ने मंगलमय ज्योति गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शास्त्रीय वाद्य यंत्र प्रतिस्पर्धा में सभी टीमों ने उत्कृष्ठ प्रदर्शन किया। गज़ल गायन प्रतिस्पर्धा में कुल 9 टीमों ने अपने सुरों से समां बांध दिया। सायंकालीन सत्र में प्रथम मंच पर मूक अभिनय व मिमिक्री की धूम रही। हिसार से आई डॉ. अमरजीत कौर ने 'कोटि में बटन लगवा दे पिया' हरियाणवी गीत गाकर दर्शकों को झूमने पर विवश किया, वहीं सोनीपत से पधारे सुरेन्द्र व विद्या तंवर ने संयुक्त रूप से हरियाणवी गीत 'रै गौरी तैरा जोबन करै सै कमाल' प्रस्तुत करके दर्शकों को आनंदित किया। वहीं चुटकुला सम्राट आजाद सिंह ने हरियाणवीं चुटकुलों को अपने अंदाज में प्रस्तुत करके सभी को हंसाकर लोट-पोट कर दिया एवं कार्यक्रम में चार-चाँद लगाए।

भंगड़ा, गिद्दा व राजस्थानी नृत्यों की धूम रही दूसरे दिन
युवा महोत्सव के दूसरे दिन जहां मुख्य मंच पर भंगड़ा, गिद्दा व राजस्थानी नृत्यों की धूम रही, वहीं बी.एड. ओपन स्टेज पर भक्ति व आस्था का माहौल रहा। मुख्य मंच पर टीम नं. 34 ने धमाकेदार व जोश से भरपूर भंगड़ा प्रस्तुत करके दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया। पश्चिमी वाद्य (एकल) प्रतिस्पर्धा में टीम नं. 34, 14 व 8 ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके अतिरिक्त विभिन्न कॉलेजों के प्रतिभागियों ने भजन व शब्द सुनाकर सम्पूर्ण वातावरण को भक्तिमय कर दिया। टीम नं. 43 की प्रतिभागी 'काहै भूल गए मेरी प्रीत रै' भजन गाकर दर्शकों का मन मोह लिया।

नागिन का डांस देखकर सब हो गए आश्चर्यचकित
टीम नं. 14 की छात्राओं ने नागिन नृत्य 'मैं नागिन तू सपेरा, बच के मुझसे रहना' प्रस्तुत करके दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया। टीम नं. 1, 7 व 39 ने क्रमश: गिद्दा प्रस्तुत करके पंजाबी विरासत से परिचित करवाया। टीम नं. 8 द्वारा 'केसरिया बालम पधारो म्हारे दैस' पर राजस्थानी नृत्य प्रस्तुत करके राजस्थानी संस्कृति से रूबरू करवाया। बी.एड. ओपन स्टेज पर समूह गीत प्रतिस्पर्धा का आयोजन हुआ।

आजादी दिलाने के समय को याद करवाया
वन एक्ट प्ले प्रतिस्पर्धा में भगत सिंह पर आधारित नाटक 'गगन दमामा बाजिओ' प्रस्तुत करके आजादी दिलाने के समय को याद करवाया। वेस्टर्न मुखर प्रतिस्पर्धा का भी आयोजन किया गया, जिसमें सभी विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी प्रस्तुति द्वारा वेस्टर्न संस्कृति से अवगत करवाया। टीम नं. 1 'खुशियों के गुल खिलाएंगे हम, जन्नत इसे बनाएंगे...' गीत प्रस्तुत करके देशभक्ति की भावना से दर्शकों को ओतप्रोत कर दिया। इसके अलावा टीम नं. 43 द्वारा प्रस्तुत गीत 'देखती तुम्हें यह जमीन, देखता यह आसमान' ने दर्शकों का मन मोह लिया। टीम 42 द्वारा प्रस्तुत भजन 'बसों मेरे नैयन में नंदलाल' ने दर्शकों को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।












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