खाप प्रमुख भी बोले कम उम्र में लड़कियों की शादी ठीक नहीं

माता-पिता व रिश्तेदारों का कर्तव्य बनता है कि यह अपनी लड़कियों के मोबाइल प्रयोग तथा वेशभूषा पर ध्यान दें। खापों का दायित्व है कि वह 36 बिरादरी के लोगों को शामिल करे और गांव स्तर पर संगठन बनाए। इसमें महिलाओं व युवाओं को भी शामिल किया जाए और छुट्टियों के समय सदाचार शिविर लगाकर अलग-अलग लड़के व लड़कियों को सदाचार के बारे में बताए।
शिविर में अच्छे उपदेश दिए गए ताकि देश का वातावरण अच्छा बन सके। समाज व राज के नियंत्रण के बिना कुछ बदलाव नहीं हो सकता। दोनों मिलकर काम करेंगे, तभी बदलाव होगा। यदि कम उम्र में लड़की की शादी कर दी गई तो वह शिक्षित नहीं होंगी और महिला कॉलेजों का क्या औचित्य रह जाएगा। यही नहीं शिक्षित न होने पर महिलाएं ऊंचे पदों पर कैसे पहुंच पाएंगी।
उन्होंने कहा कि मनु स्मृति में वैभीचारियों को लोहे को लाल करके पलंग पर लेटाकर सजा देने की बात कही गई है, लेकिन आज के समय में ऐसा संभव नहीं, लेकिन कानून व समाज को इस तरफ ध्यान देना होगा। दुष्कर्म करने वालों के खिलाफ 302 धारा लगनी चाहिए और फांसी की सजा मिलनी चाहिए और ऐसे मामलों का कोर्ट में तुरंत निपटारा होना चाहिए।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जो खाप प्रतिनिधि कम उम्र में लड़की की शादी की बात कर रहे हैं, वह उनसे बात करेंगे और समझाएंगे। उनसे पूछा गया कि 19 अक्टूबर को जींद में खाप प्रतिनिधियों की बैठक में आप शामिल होंगे तो उन्होंने कहा कि उस दिन उन्हें दिल्ली किसी कार्यक्रम में जाना है। उन्होंने मांग की कि अश्लील साहित्य व टीवी पर रोक लगाई जानी चाहिए।












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