नया रिसर्च- आवेग में आकर रैगिंग करते हैं छात्र

यह रिपोर्ट पीजीआईएमएस, रोहतक के मनोरोग विभागाध्यक्ष एवं समिति के चेयरमैन डॉ. राजीव गुप्ता तथा उनकी टीम के अन्य सदस्यों डॉ. राजीव डोगरा, डॉ. राजीव त्रेहन, डॉ. देवेंद्र अरोड़ा तथा डॉ.कृष्ण कुमार ने जनवरी 2011 से अगस्त 2012 तक हरियाणा के विभिन्न शिक्षा संस्थानों में कार्य करते हुए करीब 3 हजार छात्रों पर रैगिंग संबंधी शोध करते हुए तैयार की है।
डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि उनकी टीम ने हरियाणा के लगभग पांच हजार शैक्षणिक संस्थानों में जाकर नवांगतुक व वरिष्ठ छात्रों पर लगभग दो हजार सैंपल एकत्रित किए और विभिन्न मानसिक कारणों की संभावनाएं जांची। उन्होंने बताया कि एमसीआई, आरसीआई और यूजीसी द्वारा रैगिंग प्रबंधन के दिशा-निर्देश पहले से ही लागू किए गए हैं, परंतु यह रिपोर्ट विभिन्न संस्थानों मे रैगिंग रोकने में काफी मददगार साबित होगी। इस सर्वेक्षण के दौरान यह पाया गया कि नवांगतुक एवं वरिष्ठ दोनों ही तरह के छात्र-छात्राएं आवेग में होते हैं और कई बार घातक सिद्ध होते हैं।
कुलपति डॉ.एस.एस.सांगवान ने कहा कि आज के संदर्भ मे रैगिंग न केवल छात्रों के लिए एक डर है अपितु माता-पिता भी ऐसी संभावनाओं से डरते हैं। हाल ही में हुई रैगिंग की कुछ दुर्घटनाओं ने इसे आपराधिक रुप भी दिया है जोकि समाज के लिए घातक है। इसी को ध्यान में रखते हुए रैगिंग के प्रति लोगों को जागरुक किया जा रहा है। पुलिस की मदद ली जा रही है और एंटी रैगिंग कानून बनाए जा रहे हैं। आगे पढ़ें- लिपस्टिक बताती है लड़की का व्यक्तित्व।












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