ब्लैक में एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1000 रुपए

LPG cost Rs. 1000 in black
नारनौल। केंद्र सरकार ने एक साल में सबसिडी पर छह रसोई गैस के सिलेंडर देने की घोषणा क्या की, मार्केट में पहले से ही ब्लैक में बिक रही रसोई गैस के दाम एकाएक बढ़ गए। ब्लैक में एक सिलेंडर एक हजार रुपए के भाव में मिल रहा है। रसोई गैस को लेकर जिले में अकसर मारामारी और कालाबाजारी की शिकायतें प्रशासन को मिलती रहती हैं। गैस की कालाबाजारी करने वाले लोग अब तक 200 रुपए प्रति सिलेंडर अतिरिक्त कमाई करते थे। पहले चार सौ रुपए वाला एक सिलेंडर ब्लैक में छह सौ रुपए के भाव मिल जाता था। ज्यादा हुआ तो 650 रुपए अदा करके उपभोक्ता जैसे-तैसे सिलेंडर ले लेते थे, किंतु केंद्र सरकार की पिछले सप्ताह रसोई गैस की नई नीति की घोषणा के बाद ब्लैक बाजार में एकाएक उछाल आ गया।

सरकार की योजना के तहत प्रत्येक उपभोक्ता को साल में छह सिलेंडर सबसिडी और उसके बाद प्रत्येक सिलेंडर 750 रुपए में मिलेगा। इसके चलते रसोई गैस की कालाबाजारी करने वालों ने ओपन मार्केट के 750 रुपए वाले सिलेंडर को अभी से एक हजार रुपए ब्लैक में देना शुरू कर दिया है। इस धंधे से जुडे एक व्यक्ति ने बताया कि ऐसे सिलेंडर की जरूरत सामान्य तौर पर कॉमर्शियल वाहनों के मालिकों को पड़ती है। जो एक सिलेंडर से करीब 300 किलोमीटर दूरी तय कर लेते हैं। उनके लिए ज्यादा पैसे देना आसान रहता है। सूत्रों के मुताबिक नारनौल शहर में सेन चौक के निकट, गल्र्स आईटीआई के पास, नीरपुर चौक, सिंघाना रोड और तालाब बहादुर सिंह रोड पर कुछ ऐसे ठिकाने हैं, जहां ब्लैक में गैस सिलेंडर उपलब्ध हैं।

इन सिलेंडरों की आवश्यकता या तो उन उपभोक्ताओं को पड़ती है, जिनके घर में अचानक गैस खत्म हो जाए और एजेंसी से बुकिंग करवाने पर कुछ दिन बाद सिलेंडर मिलने की स्थिति हो। तब रसोई का काम करवाने के लिए या तो आसपास से या फिर ब्लैक करवाने वालों से ही सिलेंडर लेना मजबूरी होती है। दूसरे कालाबाजारी की शरण वो लोग लेते हैं, जो अपनी गाड़ी में अवैध रूप से गैस कीट लगवाए हुए हैं। ऐसे गैस किट से शहर में अनेक टैक्सी भी चलती है। क्योंकि गैस से चलने वाली गाड़ी पर करीब एक रुपए प्रति किलोमीटर का खर्च आता है। जबकि डीजल और पेट्रोल के रेटों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी से गाड़ी चलाने का खर्चा भी बढ़ता जा रहा है। इसी लिए गैस कीट लगाकर गाड़ी चलाने वालों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो रही है।

कम सप्लाई भी बड़ा कारण

जिले में इस समय आठ एजेंसियां कार्यरत हैं। इन एजेंसियों के मार्फत एक लाख तीस हजार 98 उपभोक्ता रसोई गैस इस्तेमाल करते हैं। इनमें 51 हजार 944 सिंगल सिलेंडर धारक उपभोक्ता है। जबकि 78154 डबल सिलेंडर उपभोक्ता शामिल है। जानकारी के मुताबिक अगस्त माह में एक लाख तीस हजार 98 उपभोक्ताओं की एवज में गैस एजेंसियों पर 64764 भले सिलेंडरों की सप्लाई हुई।

खाद्य आपूर्ति अधिकारियों की मानें तो 65324 सिलेंडर कम सप्लाई हुए। इसका कारण गैस आपूर्ति कंपनियों की ओर से ही गैस में कमी के चलते यह सप्लाई कम हुई। इस कम गैस सप्लाई के चलते एजेंसियों पर जब उपभोक्ताओं की लाइन लगती है, तो इसकी आड़ लेकर एजेंसी संचालक पहले बुकिंग और फिर गैस आने पर सप्लाई का फरमान जारी कर देते हैं, प्रभावशाली लोगों को तो, नियम की पालना से गैस मिल जाती है, किंतु आम उपभोक्ता इंतजार करने की बजाय ब्लैक में सिलेंडर खरीदने को विवश हो जाता है।

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