ताजमहल के कारण संकट में आगरा का पेठा

अधिकारियों का कहना है कि धुंए से ताज महल के पत्थरों का रंग बिगड़ रहा है। ताज बचाने की मुहिम के तहत कई पेठा यूनिटों को सील कर दिया गया है तथा कइयों को कारोबार बंद यमुना पार जाने की नोटिस दी गयी है।
आगरा का पेठा दुनिया भर में मशहूर है लेकिन अब पेठा दुकानों पर तालाबंदी का ख़तरा मंडराने लगा है। कारण यह कि दुनिया के अजूबे ताजमहल की सफेदी को खतरा हो रहा है। ताजमहल के सफेद पत्थरों को प्रदूषण से खतरा है और अब कहा जा रहा है कि पेठा बनाने में निकले वायु प्रदूषण से ताजमहल का रंग बिगड़ सकता है।
ताज बचाने की मुहिम में शामिल लोगों की पहल पर पेठा बनाने में लगे कई यूनिटों को सील भी कर दिया है। इस कदम के विरोध में पेठा व्यवसायियों ने भी मोर्चा खोल दिया है। उत्तर प्रदेश राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने आगरा शहर के तमाम पेठा यूनिटों को यमुना पार कालिंदि विहार में शिफ्ट होने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि कालिंदि विहार को पेठा नगरी के तौर पर विकसित किया जाएगा तथा वहां व्यापारियों को सभी सहूलियतें भी मिलेंगी लेकिन दुकानदार इसके पक्ष में नहीं हैं। ज्ञात हो कि पर्यावरणविद एमसी मेहता ने लगभग 18 साल पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी जिसमें कहा गया था कि आगरा में कोयला से चलने वाले यूनिटों को बंद किया जाए क्योंकि इससे ताजमहल को खतरा है। सुप्रीम कोर्ट ने 1996 में कोयले के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी।
आगरा में 500 से ज्यादा बड़े पेठा कारोबारी हैं और इनमें लगभग 50 हजार लोगों को काम करते हैं। इन कारोबारियों के लिए आगरा विकास बोर्ड ने पेठानगरी में जगह देने की पेशकश की है। लेकिन कारोबारियों का कहना है कि वहां शिफ्ट होने से उनका सारा धंधा चौपट हो जाएगा। गौरतलब है कि आगरा में बनने वाले पेठे में प्रयोग होने वाला कच्चा माल तमिलनाडु और महाराष्ट्र से आता है।












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