पाकिस्‍तान की करतूत पर क्‍या है दिल्‍ली का प्‍लान?

Jammu and Kashmir
पाकिस्तान की इस करतूत का दिल्ली कब और कैसे विरोध करेगी, यह अभी साफ नहीं है। परंतु गिलगित -बाल्टितान के ही वे लोग इस प्रस्ताव के खिलाफ उठ खडे़ हुए हैं जो पाकिस्तान के पैंतरों के मायने जानते और समझते हैं। बलावरिस्तान नेशनल पार्टी के नेता और विधायक नवाज खान नाजी ने तो असेम्बली में ही इसका मुखर विरोध किया। स्वायत्तता के इस हिमायती ने जोर देकर कहा कि गिलगित -बाल्टिस्तान का भविष्य शेष जम्मू कश्मीर के साथ जुड़ा हुआ है। कुछ इसी तर्ज पर कश्मीरियों के विभिन्न गुटों ने भी पाकिस्तान की इस पहलकमदी की खिलाफत की है।

गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का पांचवा सूबा बनाए जाने के खिलाफ जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट नामक अलगाववादी संगठन की लंदन इकाई ने लंदन में आवाज उठाई। इनका कथन है कि पाकिस्तान अपने मतलब के लिए जम्मू-कश्मीर को बांट रहा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले ‘गुलाम कश्मीर‘ में पड़ने वाले मीरपुर जिले की बार एसोसिएशन ने भी गिलगित बाल्टिस्तान के पाकिस्तान में विलय की इस कोशिश के विरूद्ध एक प्रस्ताव पारित किया है।

उधर जिनेवा में कश्मीर नेशनल पार्टी के आला नेताओं ने एक साझा बयान जारी कर दोहराया कि गिलगित -बाल्टिस्तान संवैधानिक व कानूनी तौर पर जम्मू कश्मीर रियासत का अभिन्न अंग है और गिलगित बाल्टिस्तान की असेंबली को इसके भविष्य का फैसला करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कुल मिलाकर पाकिस्तान की साजिशों की खिलाफत करने के लिए कश्मीरी व गिलगित-बाल्टिस्तान के स्थानीय गुटों ने कमर कस ली है। इनमें से अधिकांश पाकिस्तान विरोधी होने के साथ भारत विरोधी भी हैं।

ऐसी स्थिति में भारत का रूख क्या हो, यह लाख टके का सवाल है। जानकारों का कहना है कि दिल्ली को अपने मजबूत संवैधानिक व कानूनी दावे को नए सिरे से पेश कर देश-दुनिया को बताना चाहिए कि गिलगित-बाल्टिस्तान का यूं चतुराई से पाकिस्तानी सूबा बनाया जाना अर्थात पाकिस्तान में विलय भारत को मंजूर नहीं। पाकिस्तान इस इलाके का एक हिस्सा पहले ही गैरकानूनी ढंग से चीन के हवाले कर चुका है। उसे बताया जाना चाहिए कि गिलगित-बाल्टिस्तान की भूमि और लोगों को किसी वस्तु की भांति अपने हित में दुरूपयोग करने की उसकी कोशिशें कामयाब नहीं होने दी जाएंगीं। भारत को इस इलाके में पाकिस्तान विरोधी स्थानीय समुदायों के हितों की पैरवी विभिन्न मंचों और मोर्चों पर करनी चाहिए ताकि वहां के लोगों को पाकिस्तान के मोहपाश से निकाला जा सके।

लेखक परिचय- वीरेन्‍द्र सिंह चौहान वरिष्‍ठ पत्रकार एवं जम्‍मू-कश्‍मीर मामलों के अध्‍येता हैं।

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