कांग्रेस ने नेहरू, इंदिरा और राजीव को बनाया ब्रांड

कांग्रेस ने केंद्र व राज्यों में शासन के दौरान जितनी भी योजनायें चलायीं, उनमें से लगभग सभी योजनायें इन्हीं तीनों महान हस्तियों के नाम से हैं। अगर आप सरकारी योजनाओं की लिस्ट उठाकर देखेंगे तो ऐसा लगेगा कि देश को बनाने वाले सिर्फ तीन ही लोग हैं- नेहरू, इंदिरा और राजीव। सच पूछिये तो यह पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से किया गया, ताकि चुनाव के दौरान अन्य पार्टियां कांग्रेस पर हावी न हो सकें। हालांकि अब कांग्रेस के प्रचार-प्रसार में इस्तेमाल किये जाने वाले बैनरों में से नेहरू और इंदिरा की तस्वीरें कम दिखाई देती हैं। हालांकि कई बार राजीव गांधी को भी ये भूल जाते हैं।
पिछले 18 साल में करीब 450 केंद्र व राज्य सरकारों की परियोजनाएं आयीं, जिसमें हजारों करोड़ रुपए इन तीनों के नाम से ही लगाये गये। यहां तक राज्यों के मुख्य नेताओं के नामों को बढ़ावा देना भी कांग्रेस ने अपनी शान के खिलाफ समझा।
उदाहरण- राजीव गांधी के नाम पर ग्रामीण विद्युतिकरण योजना, पेय जल योजना, श्रमिक कल्याण योजना( शिल्पी स्वास्थ्य बीमा योजना, उद्यमी मित्र योजना, क्रेश योजना से लेकर राजीव गांधी अवार्ड तक सैंकड़ों कार्यक्रम चल रहे हैं।
वहीं इंदिरा गांधी और नेहरू के नाम पर इंदिरा आवास योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पेंशन स्कीम, जवाहर लाल नेहरू रोजगार योजना, नेहरू अरबन रिन्यूवल मिशन, रोजगार योजना, ग्राम समृद्धि योजना, आदि प्रमुख हैं।
इसी तरह राज्यों की बात करें तो राजीव गांधी ब्रेकफास्ट योजना, पोंडिचेरी, राजीव रत्न आवास योजना, दिल्ली, राजीव आरोग्यश्री हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम, आंध्रा, राजीव गांधी कंप्यूटर साक्षरता मशन असम, राजीव गांधी सेतु, सड़कें, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम हरियाणा, राजीव गांधी विद्यार्थी सुरक्षा योजना महाराष्ट्र, राजीव गांधी पर्यटन मिशन, राजस्थान , इंदिरा क्रांति स्कीम, इंदिरा जीवित बीमा पठाकम, आंध्रा, इंदिरा गांधी प्रियदर्शनी विवाह शगुन योजना हरियाणा, इंदिरा गांधी काफ-रियरिंग स्कीम आंध्र प्रदेश, आदि।
इन तीनों के नाम पर चल रहीं 450 योजनाओं के आंकड़ों पर गौर करें तो केंद्र सरकार की कुल 12 परियोजनाएं इन तीनों के नाम पर हैं। राज्य सरकारों की 52 परियोजनाओं पर नेहरू, इंदिरा या राजीव का नाम छपा है। देश में 98 विश्वविद्यालय/शिक्षण संस्थान इन्हीं तीनों के नाम पर हैं। देश के 6 बंदरगाह व एयरपोर्ट, 66 अवार्ड, स्कॉलरशिप व फेलोशिप, 47 खेल टूर्नामेंट, ट्रॉफी व मैडल 15 राष्ट्रीय उद्यान व अभयारण्य, 39 अस्पताल व चिकित्सा संस्थान, 37 राष्ट्रीय विज्ञान एवं शोध संस्थान और पर्व और 75 सड़कें, इमारतें व स्थान इन तीनों के नाम हैं।
राजीव गांधी को एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने की होड़ में जुटी कांग्रेस ने अपनी ब्रांडिंग का फंडा आईआईएम पर भी थोप दिया है। यही कारण है कि शिलॉन्ग के आईआईएम का नाम राजीव गांधी भारतीय प्रबंध संस्थान रखा गया है। कुल मिलाकर देखा जाये तो कांग्रेस अपनी पार्टी को आगे बढ़ाने के लिये इन तीनों हस्तियों को ब्रांड के रूप में स्थापित करती आयी है और आगे भी करेगी।
इस लेख के सभी तथ्य वेबसाइट नीटी सेंट्रल के लेख से लिये गये हैं।












Click it and Unblock the Notifications