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बीवी की पिटाई को हाईकोर्ट के जज ने कहा जायज

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बेंगलुरू। घरेलू हिंसा के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट के जज के. भक्तवत्सल विवादों में घिर गए हैं। अखबार बेंगलुरू मिरर के अनुसार पिछले हफ्ते सुनवाई करते समय जस्टिस भक्‍तवत्‍सल ने पीड़ित महिला से कहा कि पति देखभाल कर रहे हैं, तो पिटाई के सिलसिले में बात करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्‍होंने कहा कि शादी के बाद महिलाओं को थोड़ी परेशानी उठानी पड़ती है। पति उसे पैसे देते हैं, इसलिए बात करने की कोई जरूरत नहीं है।

हाईकोर्ट जस्टिस के. भक्तवत्सल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसएच कपाडि़या के पास ऑनलाइन याचिका दायर की गई है। जज से भक्‍तवत्‍सल को हटाने की गुजारिश की गई है। इस याचिका पर लगभग 500 लोगों ने दस्‍तखत किये हैं। उनके खिलाफ फेसबुक पर भी मुहिम चला दी गई है। भक्‍तवत्‍सल के नाम से बाकायदा एक पेज बना दिया गया है।

आपको बता दें कि पीडि़त महिला ने घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया था, और कोर्ट से तलाक चाहती थी। महिला का कहना था कि पति रोज उसके साथ मारपीट करता है। महिला के कथन पर जस्टिस भक्‍तवत्‍सल ने कहा कि उसको अपने बच्‍चों को ध्‍यान में रखकर पति से तालमेल बैठाकर चलना चाहिए। जीवन में अक्‍सर ऐसे पड़ाव आते हैं। उन्‍होंने कहा कि अक्‍सर ऐसे पड़ाव आते हैं, जब बच्‍चों के लिए ऐसा समझौता करना पड़ता है। तुम्‍हारा पति अच्‍छा कारोबार करता है, अच्‍छी देखभाल करता है। ऐसे में अगर थोड़ी नोंक-झोंक होती है तो क्‍या हुआ?

इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट से जस्टिस भक्‍तवत्‍सल के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है। उसके इस बयान से लोगों के साथ ही वकीलों में भी खासा नाराजगी देखी जा रही है। उनके इस बयान पर हाई कोर्ट की एक सीनियर वकील का कहना है कि उनके बयान के समय मैं कोर्ट में मौजूद थी, और बयान सुनकर मुझे धक्‍का लगा। इस तरह महिलाओं को न्‍याय कैसे मिलेगा?

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English summary
A Karnataka HC Judge is under fire after he said that it was okay for a man to indulge in domestic violence and beat his wife as long as he was taking good care of his wife.
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