कसाब की फांसी की सजा बरकरार

Supreme Court did not give relief to kasab
नई दिल्‍ली।मुंबई हमलो के आरोपी अजमल आमिर कसाब को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली, उसकी फांसी की सजा बरकरार रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार वह मुंबई हमले का आरोपी है, हमले में 166 लोग मारे गये थे। यह देश की संप्रभुता पर किया गया हमला था। ऐसे में उसे माफ नहीं किया जा सकता। वह सिर्फ एक रोबोट की तरह काम नहीं कर रहा था, बल्कि इन हमलों का आरोपी है। देश के लोगों का कहना है कि इस अपराध के लिए फांसी से कम की सजा हो ही नहीं सकती।

मुंबई हाईकोर्ट के निर्णय पर कसाब ने कहा था कि इस उसके केस की सुनवाई स्‍वतंत्र और निष्‍पक्ष तरीके से नहीं की गई। 10 अक्‍टूबर को कसाब की फांसी की सजा पर रोंक लगा दी गई। उसने मुंबई हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी।

लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्‍वागत किया है और कहा कि आतंक और मौत के आरोपी को फांसी दी ही जानी चाहिए। इस तरह के हमले बर्दाश्‍त नहीं किया जाने चाहिए। साथ ही लोगों ने यह भी सवाल उठाये कि आखिर कसाब को फांसी कब होगी। देश पर समय समय पर हमले होते रहे हैं, अगर इन हमलावरों को फांसी न दी गयी तो यह देश की सुरक्षा के साथ समझौता करने जैसा होगा।

अजमल कसाब जलमार्ग द्वारा अपने 9 साथियों के साथ दक्षिणी मुंबई में दाखिल हुआ था और लोगों पर अंधाधुन्‍ध फायरिंग शुरू कर दी थी। इसके बाद आतं‍कवादियों ने मुंबई के ताज होटल पर अधिकार कर लिया था। देश में युद्ध जैसे हालात बन गये थे। सेना और पुलिस ने मुठभेड़ में 9 आतंकियों को मार गिराया। कसाब को जिंदा गिरफ्तार कर लिया गया था।

लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया में यह भी कहा कि इन सभी आतंकियों का गढ़ पाकिस्‍तान है, सरकार को पाकिस्‍तान के खिलाफ अंतर्राष्‍ट्रीय दबाव बनाना होगा, जिससे वह भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम न दे सके।

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